प्रश्नोत्तर P1-0086 · भाग 1
एक जिज्ञासु (खोजी) के लिए सब चीजों की जानकारी होना कितना जरूरी है? आजकल इंटरनेट, YouTube, ChatGPT/AI से कुछ भी पूछ लो, जवाब मिल जाता है। तो क्या यह जानकारी लगातार ग्रहण करते रहना सही है, या एक समय पर उस पर पूर्ण विराम लगा देना सही है?
आप इस बात को पहले समझ लीजिए — AI के पीछे भी आदमी ही है। वह एक सिस्टम है, उसमें लोग अपलोड करते हैं; वह जानकारी सही भी हो सकती है, गलत भी। आपने कहा कि AI से कुछ भी पूछ लो, बता देगा — ऐसा नहीं है। एक बार पूछो, मेरा नाम क्या है? इस समय मैं कहां हूं? यह तुम्हारे अलावा कोई नहीं बता सकता। उसमें एक सीमित जानकारी है, जो अनेक लोग मिलकर अपलोड करते हैं। तो आपको यह समझ में आना चाहिए कि जो प्रश्न किया, उसका उत्तर सही है या गलत। और सही-गलत तभी बता पाओगे जब खुद को उस बात का ज्ञान हो; अनजान चीजों में उस पर निर्भर होकर कभी सही रास्ते पर नहीं पहुंचोगे।
आप Google मैप का उपयोग करते हो — कितना घुमा देता है! कई बार पुल होता ही नहीं और वह कुदा देता है, कितनी मौतें हो जाती हैं; गली में ले जाता है और गली बंद मिलती है। उस समय कौन काम आता है? जीवंत व्यक्ति। क्या आप ऑफिस से घर कभी Google के सहारे जाते हो? जब आपको नहीं पता होता, तब Google का सहारा; और जहां Google भी फेल है, वहां जीवंत आदमी चाहिए।
एक बार मैं इंदौर से मुंबई जा रहा था। मुझे छोड़ने आया व्यक्ति अपने भाई से ऑनलाइन पता कर रहा था कि ट्रेन एक नंबर प्लेटफॉर्म पर खड़ी है, जबकि वहां थी नहीं। काउंटर पर पूछा तो उन्होंने दूसरा नंबर बताया। मैंने कहा, मेरी बात मानोगे या ऑनलाइन की? हम दौड़कर गए, ट्रेन छूटने वाली थी, मैंने दौड़कर पकड़ ली। तो इन सबके पीछे आदमी ही है, और जानकारी सही भी हो सकती है, गलत भी। इसलिए जीवन में जीवंत व्यक्ति चाहिए। आपके हर प्रश्न का जवाब कभी भी सोशल मीडिया नहीं दे सकता; उसमें सीमित जानकारी अपलोड है और वह बदलती रहती है। जो रास्ता बता रहा है, वह किसी ने बंद कर दिया, तो भी जब तक अपडेट नहीं होगा, वही रास्ता बताता रहेगा। जब मुझे जरूरत थी तब अपलोड नहीं हुआ, और जब हुआ तब मैं नहीं हूं।
और एक बात बताऊं — आपको यह देखना है कि जाना कहां है; मुझे सिर्फ वहीं का पता चाहिए। पहले पक्का करिए कि मुझे जाना कहां है, पहले पते मत ढूंढिए। पते ढूंढ रहे हो, इसका मतलब लक्ष्य ही नहीं है। और पते इतने हैं, और बदलते रहते हैं — 20 साल पहले का भारत का नक्शा उठा लो, क्या वे जगहें, वे रास्ते वैसे ही मिलेंगे? मैं जैसे-जैसे आगे जाऊंगा, पीछे सब बदलता रहेगा, लेकिन मैं लक्ष्य तक पहुंच जाऊंगा। जिस पते से आप जा रहे हो, वह भी नहीं रहेगा; लक्ष्य तक पहुंचते-पहुंचते वह खत्म भी हो जाएगा, लेकिन आप लक्ष्य तक पहुंच जाओगे। बस इतना याद रखो कि जाना कहां है। अगर इस बिंदु को पकड़ लिया, तो दुनिया की कोई ताकत आपको रोक नहीं सकती; हर ताकत आपकी मदद करेगी।
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वीडियो: क्या सोशल मीडिया के द्वारा सब कुछ जाना जा सकता है ? #योगी · 2026-10-13