प्रश्नोत्तर P1-0148 · भाग 1
आंख बंद करके जब ऊर्जा को महसूस करता हूं और मन-बुद्धि शांत हो जाती है, तो सोचता हूं कि वही मैं हूं। लेकिन फिर (उठते ही) वहीं (संसार में) चला जाता हूं। इसका क्या मतलब?
जहां लिप्त हो, वहां से छुड़ाओ। मूल की यात्रा करो — मैं मूल की यात्रा बताता हूं कि तुम निकल जाओ। तुमने क्या किया? तुम वहां लिप्त हो, और समझ से अपने आप को स्थिर किया; फिर तुम्हें लग रहा है मैं ही सत्य हूं, सब मिथ्या है। बाद में जैसे उठे, वहीं चले गए। जब छोड़ दो, तब स्थिर रहोगे।
मैं कहां-कहां और कितना लिप्त हूं, यह दूर जाने से पता चलता है; घर में रहकर पता नहीं चलेगा। नहीं तो मैं इतनी मेहनत क्यों करता? देख, यहां आने में क्या स्थिति है, रोड कितना खराब हो गया है, अब इसको बनवाना पड़ेगा। अगर घर में होता तो मैं भी कहीं आराम से पड़ा रहता और लोगों को बता देता कि आराम से घर में रहकर करो। यहां धन भी लग रहा है, तन की मेहनत भी, समझ भी — सब खर्च हो रहा है। तू यहां आया तो तेरे भी पैसे लगे। अगर घर में ही होता तो दोनों का खर्च बचा देता। तो अपनों की कुटिया में आओ, जितना आपके पास समय हो, ज्यादा से ज्यादा समय दो। तब आपको कुछ समझ में आएगा।
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वीडियो: 19 सुबह अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-12