प्रश्नोत्तर P10-0182 · भाग 10
गुरुदेव, आपने कहा कि संसार में रस अनंत है, खुद ही छोड़ना होगा। इसे समझाएं।
रस तो अपने तरीके में है। जैसे दो व्यक्ति बैठे हैं और एक व्यक्ति जा रहा है। एक ने शर्त लगाई कि वह गिर जाएगा, दूसरे ने कि नहीं गिरेगा। वह गिर गया तो जिसने कहा था गिर जाएगा वह खुश होगा, दूसरे को दुख होगा; नहीं गिरा तो उल्टा। तो रस अपने तरीके में है। ऐसा नहीं कि तुम प्राकृतिक स्वाद में फंसे हो — अपने तरीके के स्वाद में फंसे हुए हो। तो अपना तरीका छोड़ो और जरूरत में जियो। स्वाद के लिए भोजन ना करके शरीर के पोषण के लिए भोजन करो, कपड़ा तन ढकने के लिए पहनो, जरूरत में घर पर सामान लाओ। अपने मान के लिए सामान इकट्ठा मत करो; घर में 80% से ज्यादा चीजें ऐसे ही पड़ी रहती हैं। अपनी क्षमता और जरूरत से ज्यादा वस्तु रखोगे तो उसकी रखवाली करनी पड़ेगी, समय देना पड़ेगा — टेंशन ही टेंशन है, रात को नींद नहीं आएगी। तो जरूरत में जियो, अपनी क्षमता के अनुसार, बोझा मत रखो।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 8 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-08