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प्रश्नोत्तर P11-0015 · भाग 11

गुरु जी, मुझे कई साल से कभी-कभी ओंकार की धुन आती है। फिर विकार वगैरह आते हैं तो चली जाती है, फिर महीनों बाद आ जाती है। अभी रात को 2 घंटे तक चली, मैं बैठा सुनता रहा। उसका क्या करूं?

क्या करोगे? मूल पे काम करो। ओंकार की धुन — इस धुन से मुक्त हो जाओ। क्योंकि अगर आप बाहर का कुछ सुन रहे हो, तो सुनने वाला और जहां से सुनाई दे रहा है, दोनों अलग हैं। जब तक आप बाहर की कामनाओं में हो, तब तक ऐसे ही भटकते रहोगे। अगर इस भवसागर से निकलना चाहते हो, तो आत्मदर्शन करो; सुनने की इच्छा का त्याग करो, नहीं तो धुन के चक्कर में जिंदगी चली जाएगी। इतना सुन लिए, क्या हुआ? 15 साल चले गए ना धुन के चक्कर में। धुन जिसके द्वारा आ रही है, वह द्वार एक दिन बदल जाएगा, खत्म हो जाएगा — फिर आप पगला जाओगे, क्योंकि धुन के आदी हो जाओगे। अभी कुछ दिन पहले मेरी आवाज कैसी निकल रही थी, आज कैसी निकल रही है; अंदर वाला वही है, लेकिन जिसके द्वारा निकल रहा था, वही खराब हो गया। अगर मैं इच्छा रखूं कि पुरानी आवाज ही ठीक थी, तो मुझे दुख होगा। तो बाहर से कुछ नहीं चाहिए; नहीं तो आत्मदर्शन नहीं होगा, और ऐसे ही अनेक पिंड धारण करते रहोगे। धुन का चक्कर छोड़ो।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 22 फरवरी 2026 #योगी · 2026-02-22