प्रश्नोत्तर P11-0120 · भाग 11
कहते हैं "ब्रह्म एक है, द्वितीय नास्ति"; फिर बताने वाला, सुनने वाला — हम तो अनेक हो गए। और गुरु ने चेतन, चेतना, चैतन्य कहा था — चेतन कौन है, समझ नहीं आता।
ब्रह्म एक है, हमारी बात थोड़ी ना हो रही है। नाश रूप का होता है, लेकिन रूप के पीछे भी तो कोई है। यहां बातें काम नहीं करेंगी; देखो ना — द्वेष के पीछे कौन है, द्वेष को समझने वाला कौन है? द्वेष अलग है, और समझने वाला अलग। शरीर चेतन है; आप चेतन के चक्कर में पड़ गए। आत्मा को भी चेतना कहा गया, समझ को भी चेतना कहा गया। कहने का मतलब, सबके पीछे आप हो; आप देखो आप क्या हो। अभी तो आप किसी के द्वारा अपने आप को देख पा रहे हो कि मैं यह हूं; जब द्वारा हट जाएगा, तब देख पाओगे कि आप क्या हो। पहले द्वारा तो हटाओ।
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वीडियो: 18 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2026-01-18