प्रश्नोत्तर P12-0156 · भाग 12
दैनिक अभ्यास में हम कुछ ऐसा कर पाएं जिससे कि अपनी चेतना का विस्तार हो — वो क्या करें?
बिना इच्छा-अपेक्षा के सत्कर्म करो, जरूरतमंदों की सेवा करो। कर्म के द्वारा हमारे अंदर विकार जमा हुए हैं — जब कर्म में बेईमानी की तो विकार आए; अभी हमने छोड़ा, लेकिन विकार तो जमा हैं, और कर्म में ईमानदारी अपनाएंगे तब वो हटेंगे। समय निकालकर उन जीवों को भोजन दो जहां आपका अहंकार काम ना करे, जैसे चींटियों को; और उन असहाय लोगों को जिनको जरूरत हो, जहां आपका मान ना खड़ा हो, जो आपको बाहर से कुछ ना दे पाएं पर अंदर से आशीर्वाद दें। ऐसे लोगों की सेवा करोगे तब आंसू आएंगे, और उनसे आपके विकार धुलेंगे — विकारों की धुलाई तभी होगी जब आपके द्वारा सत्कर्म होगा। वहां बिना मतलब का मतलब ना हो, और जहां जरूरत नहीं है वहां मत दो — देखो कि सामने वाला उसका सदुपयोग करेगा, तब दो। और धीरे-धीरे, आराम-आराम से समझकर आगे बढ़िए; आवेश में, जज्बात में आकर कुछ मत करिए।
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वीडियो: कोई रास्ता दिखाओ... #योगी · 2026-07-12