आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P12-0157 · भाग 12

(गीता का हवाला देकर) गीता में तो भगवान ने अर्जुन को ध्यान करने की बात कही है — तो?

अर्जुन ने कभी ध्यान किया? आपने देखा, ज्ञान देते-देते, प्रश्न करते-करते हो गया — उन्होंने कुछ किया ही नहीं। अर्जुन पूछते गए, वो बताते गए; अर्जुन समझते गए, और समझते-समझते आगे पूछते गए, पूछते-पूछते कुछ बचा ही नहीं, उपलब्धि हो गई। कृष्ण ने कोई विधि नहीं बताई कि जाकर ये करके आओ — सारी विधियों से मुक्त होना ही ज्ञान है। इसीलिए मैं कहता हूं, अध्यात्म समझ का मार्ग है, इसका कोई मार्ग ही नहीं है; करना तब होता जब मुझे बाहर जगत से कुछ चाहिए होता। अब तो चाहिए से मुक्त होना है, तो इसके लिए क्या करना — समझकर छोड़ना; समझोगे तो छूट जाएगा। हम उम्मीदें बनाकर रखते हैं कि आत्मज्ञान होगा तो ऐसा होगा, ब्रह्मज्ञान होगा तो ऐसा होगा — ज्यादा की उम्मीद में इधर छोड़ते जा रहे हैं, उधर आगे बढ़ते जा रहे हैं, ना इसका उपयोग कर पा रहे, ना आगे कुछ मिल रहा। कुछ होना है, कुछ करना है, कुछ पाना है, कुछ बनना है — अरे, कुछ नहीं, मैं आप हूं; पहले भी कुछ नहीं था, आखिर में भी कुछ नहीं, तो सीधा 'कुछ नहीं' में आ जाओ।

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वीडियो: कोई रास्ता दिखाओ... #योगी · 2026-07-12