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प्रश्नोत्तर P13-0076 · भाग 13

मुझे आत्मिक कल्याण समझ में नहीं आता; घरेलू तरीके से समझाइए — आत्मिक कल्याण क्या है?

आप सीधा यह कहकर नहीं निकल सकते कि मुझे नहीं पता; आपने अपनी जरूरत के हिसाब से हर चीज पता की ना, वैसे आत्मिक कल्याण भी आपको पता करना पड़ेगा। आत्मिक कल्याण का मतलब — अगर मैं राग, द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा, मेरा और कर्ता में अशांत हूं, व्याकुल हूं, उदास हूं, बेचैन हूं, दुखी हूं, निराश हूं, तो उससे अपने आप को छुड़ा लेना आत्मिक कल्याण है। राग-द्वेष दरवाजे हैं; छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड करोगे, तभी राग-द्वेष होगा। जैसे किसी ने भोजन बनाकर दिया और भोजन वाहवाही के लायक नहीं, फिर भी आप वाहवाही कर दो, तो जैसा था वैसा नहीं बताया — पाखंड हो गया; और जैसा था वैसा बता दिया, तो राग-द्वेष दोनों नहीं होंगे। जब आप अपने शरीर के लिए खुद कर्म करते हो, और उसके निमित्त सिर्फ आप हो, तो उसमें राग-द्वेष नहीं होता। दोनों ही दुख का कारण हैं — राग से बाद में दुख होगा, द्वेष से तुरंत। अब समझने के बाद दोनों दरवाजों पर नहीं जाओगे, लेकिन बहुत जा चुके हो; तो पिछला — आप ईमानदारी के साथ सत्कर्म करोगे, और उससे कैसे छुटकारा पाना है, वो सत्संग द्वारा बताया जाएगा, तो आप मुक्त हो जाओगे। अलग से कोई विधि, कुछ करने की आवश्यकता नहीं है।

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वीडियो: कर्म से पहले क्या ? #योगी · 2026-05-09