प्रश्नोत्तर P13-0095 · भाग 13
विश्वास क्या है? लोग कहते हैं मैंने इन पर विश्वास किया, इन्होंने धोखा दिया — विश्वास हमें क्यों करना पड़ता है?
विश्वास एक सिस्टम की व्यवस्था है — आपकी व्यवस्था नहीं, सिस्टम की। हर काम स्वयं नहीं कर सकते; एक दूसरे का सहारा लेना पड़ता है। जैसे किसी से गिलास पानी मांगा तो विश्वास करना पड़ेगा कि वो लाएगा — लाया न लाया बात अलग। लेकिन विश्वास का एक दायरा है; उस दायरे से ज्यादा अगर करते हो तो अब आपकी मजबूरी है, कमजोरी है। अपनी कमजोरी को विश्वास का नाम मत दो — कमजोरी दूर करो। एक गिलास पानी के लिए कई घंटों किसी का इंतजार कर रहे हो तो या तो अपाहिज होगे या ऑप्शन नहीं। विश्वास प्रथम सीढ़ी है, लेन-देन में भरोसा करना ही पड़ेगा — लेकिन दायरे से आगे मत जाओ। करने वाले व्यक्ति बनो, मेहनती बनो, खुद करो। पहुंचा हुआ व्यक्ति यही कहेगा — मैं पता बताता हूं, पते पे तुझे यात्रा करनी पड़ेगी; नहीं पहुंचा हुआ कहेगा मैं पहुंचा दूंगा और जीवन भर उपयोग करेगा। विश्वास को बदनाम मत करो — प्राकृतिक व्यवस्था है; दायरे से आगे गए तो गलती आपकी है।
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वीडियो: विश्वास क्या है ? - विश्वास का अर्थ समझें और जानें - आध्यात्मिक सत्संग - योगीजी का सत्संग - · 2025-07-31