आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P13-0096 · भाग 13

आध्यात्म में आगे बढ़ना है तो पहले क्या समझना पड़ेगा?

बिना समझे अगर बढ़ेंगे तो कोई मतलब नहीं — बाद में पछताना पड़ता है कि कुछ पाने गया था, यहां तो कुछ भी नहीं मिला। अध्यात्म का मतलब सीधा है — जहां अपने आप को समझना है। अपने आप को समझने में कुछ नहीं मिलेगा; बाहर समझ रहे हो तो रस मिलेगा, लेकिन मैं में कुछ भी नहीं है। आध्यात्म में आने के बाद लोग निराश हैं कि कुछ हो नहीं रहा — होना ही तो बंद होगा; होने में ही तो आप परेशान थे, होने से मुक्ति चाहिए था। इस संसार से कैसे भी अपने आप को छुड़ाओ — सीधा सरल रास्ता है तप और परोपकार; राग-द्वेष-मोह-आसक्ति-इच्छा-अपेक्षा-मेरा-कर्ता के भाव से कैसे भी अपने आप को छुड़ाओ। अध्यात्म का सीधा मतलब है उम्मीद से अपने आप को मुक्त करा लेना। अध्यात्म कुछ नहीं चाहिए का मार्ग है; अपने आप में हो जाना अध्यात्म है। अगर आप किसी और में हो रहे हो तो अध्यात्म कहां से है? मान की इच्छा सबसे खतरनाक है। अच्छे लोगों के साथ उठो-बैठो जिनका कर्म अच्छा है; दुष्ट का साथ मत करो। साथ सोच-समझ के करो। मर्यादा में जियो — सामने कौन है ये देख के बात करो।

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वीडियो: आध्यात्म में आगे बढ़ना है तो यह समझना पड़ेगा ! Aadhyatmik satsang - yogiji ka satsang -- · 2025-08-01