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प्रश्नोत्तर P13-0185 · भाग 13

गुरु जी, जिससे हमारा कोई संबंध नहीं, उसकी सेवा या मदद करते हैं और उससे कुछ नहीं चाहिए, तो वो भी प्रेम हुआ। लेकिन जो हमारे रिश्तेदार और परिवार हैं, उनसे तो अपेक्षा रहती है। अनजान आदमी के लिए करना निष्काम सेवा है?

वो निष्काम सेवा हुआ, सत्कर्म हो गया — उससे भी आनंद की स्थिति आती है, ये भी वहीं तक पहुंचाता है। अब आप जिसे जानते हैं, जिसके साथ रहते हैं, उठते-बैठते हैं, उनके लिए कुछ करिए और कुछ नहीं चाहिए — एक बार नहीं, दो बार, तीन बार — फिर आप देखिए आप में कैसे चेंज आता है। देखो ना, अपने घर पे एक दिन मेहमान आता है, अच्छा लगता है; हाथ में मीठा लेके आए तो अच्छा लगता है। दूसरे दिन होता है कब जाएगा, तीसरे दिन लगता है ये तो एकदम पका रहा है। क्यों बदल गया भाव? अगर वो पहले दिन ही कहता जाऊंगा, तो दूसरे-तीसरे दिन वाला भाव नहीं आता। तारीफ भी दो दिन अच्छी लगती है। प्रेम कभी बदलता नहीं है — आप उसके साथ चाहे जितना भी रहो, वो बदलता नहीं। आप किसी के साथ दो-चार दिन रहिए, पता चल जाएगा वो प्रेम है या नहीं। प्रेम में आप चाहे जितने दिन उसके साथ रहिए, उसका वैसा ही बर्ताव रहेगा, कभी बदलेगा नहीं।

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वीडियो: प्रेम और आनंद में कैसे रहें ? - aadhyatmik pratyaksh gyan Yogi #livesatsang · 2025-04-20