प्रश्नोत्तर P13-0186 · भाग 13
गुरु जी, क्या ये कह सकते हैं कि प्रेम और आनंद एक दूसरे के पूरक हैं — कि प्रेम करो तभी आनंद आएगा?
"करो" शब्द नहीं जमता है। करो में एक प्रयास है। प्रेम होता है, करना नहीं पड़ता है। कुछ नहीं चाहिए और आप किसी के लिए कुछ कर रही हैं, तो वो स्थिति होती है। मैं तो कह रहा हूं, कुछ ना बोलो, बस समझ लो उसको। मैं इसलिए कुछ बोल नहीं रहा हूं, क्योंकि उसके लिए कोई दूसरा रूप है ही नहीं। आप उसके साथ जी रहे हो और आपको कुछ नहीं चाहिए — प्रेम है।
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वीडियो: प्रेम और आनंद में कैसे रहें ? - aadhyatmik pratyaksh gyan Yogi #livesatsang · 2025-04-20