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प्रश्नोत्तर P14-0044 · भाग 14

गुरु जी, आपसे मिलने की ये चाहत, ये इच्छा भी आखिर क्यों जागती है? ये प्यास क्यों जागती है, और मिलने से क्या होगा?

इसलिए कि मिलने में आप जी रहे हैं, इसलिए मिलने की इच्छा बनी है। सुबह से शाम तक मिलने में ही तो जा रहे हैं, सोने भी जा रहे तो अच्छी नींद के लिए जा रहे हैं। जब तक दूसरों से मिलने की इच्छा है, तब तक खुद से भी मिलने की इच्छा बनी रहेगी। दूसरों से मिलने की इच्छा छूट जाए, तो खुद से मिलने की भी इच्छा खत्म हो जाए, क्योंकि मिलना हो जाएगा। जब तक किसी से मिलने की उम्मीद है, तब तक खुद से मिलने की उम्मीद बनी रहेगी। इसीलिए तो कहते हैं — उम्मीद छोड़ दो, बस बात ही खत्म।

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