आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P14-0045 · भाग 14

गुरु जी, प्यास तो है अपने आप को खोजने की, उसको जानने की जो हमारे अंदर ही है — उसे कैसे जानें?

पहले समझो — अंदर भी मैं हूं, बाहर भी मैं हूं, मैं ही मैं हूं। बस 'तू' को छोड़ दो, जानने वाला बचेगा। 'तू' मतलब 'मेरा'। मेरा भी क्यों बना? उम्मीद के कारण मेरा बना हुआ है। उम्मीद छोड़ दो तो मेरा भी खत्म। जो आपने तरह-तरह की, हर लोगों से अलग-अलग उम्मीदें बना के रखी हैं, वह छोड़ दो।

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