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प्रश्नोत्तर P14-0046 · भाग 14

गुरु जी, सांसारिक उम्मीद से छूटने के लिए ही तो ये उम्मीद जगी है कि मैं वहां से छूट कैसे जाऊं — तो ये भी तो एक उम्मीद हो गई?

पकड़ना उम्मीद है, छोड़ना उम्मीद नहीं है। अब तो मूल में आना चाहते हो, उम्मीद से मुक्त होना चाहते हो। एक संकल्प को तोड़ने के लिए एक संकल्प बनाना पड़ता है। पहले नशा नहीं करते थे, बाद में किए; अब छोड़ना है तो एक बार बोलना पड़ेगा — आज से मैं नशा छोड़ रहा हूं। तो निर्विकार होने की उम्मीद बना लीजिए, क्योंकि विकार आपने धारण किया है। संकल्प बनाइए कि राग, द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा, मेरा और कर्ता के भाव से मुझे मुक्त होना है, और इसके लिए जो करना है करिए। यह संकल्प सारे संकल्पों को खत्म करेगा और आखिरी में खुद खत्म हो जाएगा। यह आपको बनाना पड़ेगा, क्योंकि आप संकल्प में जी रहे हो। जब तक अपने आप को अनेक पिंडों, अनेक वस्तुओं से नहीं छुड़ा लोगे, तब तक यात्रा जारी रहेगी।

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वीडियो: इतने सरल ज्ञान को इतना रहस्यमय क्यों बना दिया गया | Why is Simple Truth made so Mysterious? in Hindi · 2026-03-06