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प्रश्नोत्तर P16-0148 · भाग 16

सात्विक ऊर्जा को जागृत करने के लिए क्या करें?

पूरी तरह किसी की निंदा मत करो — कोई चाहे जैसा काम करे; जब परमात्मा ने स्वीकार किया तो आप कौन होते हो? जब कहते हो कि पत्ता भी परमात्मा के हिलाने से हिलता है, तो आप कौन होते हो किसी की निंदा करने वाले? अगर आप सहायता करके उसे बुराइयों से निकाल सकते हो तो मदद करो, या संविधान से या प्रकृति से ऐसा काम मिला है तब करो। बेमतलब दूर बैठकर किसी की निंदा कर रहे हो तो आप फंस रहे हो — वह अपना काम कर रहा है, बदलाव भी कुछ नहीं हो रहा, और आप वहां अपनी ऊर्जा खत्म कर रहे हो। और निर्विकार होने के लिए काम करो — कैसे मैं निर्विकार हो जाऊं: राग, द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा, मेरा, कर्ता का भाव, "अपने तरीके से कुछ चाहिए" — इनका त्याग करो। और लोगों की सेवा करो, जितना हो सके — निर्धन की, असहाय की, जो जरूरतमंद हैं; जब भी मौका मिले, सेवा कर दो। यह सत्कर्म आपको आपसे मिलाता है। अपने आप को किसी भी तरीके से सत्कर्म में लगाओ। सात्विक ऊर्जा पूरी तरह तभी जागृत होगी जब आप पूरी तरह निर्विकार होंगे — विकारों से मुक्त होने के बाद अपने आप ही जागृत हो जाएगी; अपने को कुछ नहीं करना, बस ऊपर से हटाना है। जैसे कपड़ा पहनकर समाज में घूमे, गंदा हुआ, तो मैल धोना है — कपड़ा तो अंदर वैसा ही है; ऊपर का सांसारिक मैल धो दो, कपड़ा जिस रंग का होगा वह आ जाएगा। पूरी तरह जागृत हो गई तो आप पॉजिटिव से भी छूट गए, नेगेटिव से भी छूट गए, और सात्विक ऊर्जा के द्वारा वहां पहुंच जाओगे — फिर आत्मा का परमात्मा से मिलना।

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वीडियो: ऊर्जा के बारे में रहस्यमय ज्ञान / #योगीजी_का_सत्संग #ऊर्जा रहस्यमय #ज्ञान #satsang · 2024-08-02