आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P17-0014 · भाग 17

जो लोग बाद में ये वीडियो सुनेंगे वो पूछेंगे — मोह से निकलें कैसे?

जब मैं इस दुनिया में आया, किसी को नहीं पहचानता था; किसी ने बताया ये तेरी मां है, ये तेरा बाप है। लेकिन हमने मां-बाप, भाई-बहन, दोस्त-यार क्यों स्वीकार किया? क्योंकि उनसे मुझे कुछ मिला। उस भाई की याद ज्यादा आती है जो मेरी केयर करता है, मेरे तरीके से देता है; मां-बाप में से उसी की तरफ खिंचाव होता है जो मेरी केयर करता है; दोस्त वही पसंद आते हैं जो मेरी बात मानते हैं। आसक्ति कैसे हुई, बंधन कैसे हुआ? मुझे मेरे तरीके से जिसने भी दिया, उसके प्रति बंधन हो गया, आसक्ति हो गई — उसकी याद सताती है दूर जाने पे, "इसके बिना नहीं रह पाएंगे", क्योंकि उसने मेरी डिमांड पूरी की, मेरी भावनाओं को समझा। लेकिन वो दिया शरीर तक — शरीर की जरूरतें पूरी कीं, और वो मुझे बड़ा प्यारा लगने लगा। अब मुझे इससे निकलना है, लेकिन उसकी याद तब तक सताएगी जब तक वो चाहिए। मैंने "चाहिए" के माध्यम से उसे अपना बनाया — सीधा अपना नहीं बनाया; उसके थ्रू कुछ मिल रहा था। तो वो मिलने की इच्छा का पूरी तरह त्याग करना पड़ेगा। उसे आप सीधा नहीं छोड़ सकते; जिसके द्वारा पकड़े हो, वो छोड़ना पड़ेगा, तो वो छूट जाएगा।

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वीडियो: आखिर तेरा क्या होगा ? #योगी · 2026-01-11