प्रश्नोत्तर P17-0073 · भाग 17
गुरु जी, शिवलिंग और ज्योतिर्लिंग का क्या अर्थ है? क्या शिव और शंकर एक ही हैं?
वह लिंग नहीं है, प्रकाश पुंज है — लिंग से, नर-मादा से वह परे है; लिंग तो शरीर में होता है, जो पहले नहीं था और बाद में नहीं रहेगा। ज्योति मतलब प्रकाश पुंज, और लिंग मतलब पृथ्वी से जुड़ा हुआ — इसलिए ज्योतिर्लिंग कहते हैं। जैसे दिया जलाओ तो उसका प्रकाश कहां से आ रहा है, उसका नाप कोई नहीं कर सकता — वैसे ही वह निराकार ब्रह्म है, उसका आदि-अंत कोई नहीं पा सका। 12 ज्योतिर्लिंगों में 11 जगह निराकार ब्रह्म है, और एक जगह (त्र्यंबकेश्वर) ब्रह्मा-विष्णु-महेश साकार हैं, जहां प्रकाश नहीं, गड्ढे जैसा है। शिव और शंकर अलग हैं — ब्रह्मा, विष्णु, महेश (शंकर) साकार हैं; शिव और परांबा निराकार ब्रह्म और निराकार शक्ति हैं, और ब्रह्मा, विष्णु, महेश, पार्वती, सरस्वती, लक्ष्मी सब उसी से हैं। शंकर जी ने इतनी तपस्या की कि भेद ही खत्म हो गया — "मैं था तो हरि नहीं, हरि आए मैं नाहिं" — इसलिए शिव-शंकर कहे जाने लगे।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21