प्रश्नोत्तर P17-0074 · भाग 17
गुरु जी, सारे ग्रंथों में राम, कृष्ण और देवता किसी न किसी से लड़ते ही रहे — लड़ाई से मुझे घबराहट होती है। भगवान क्यों लड़ते हैं, और लड़ाई कब रुकेगी?
लड़ाई दो तरह की होती है — एक स्वयं के लिए, एक समाज के लिए। उन्होंने अपने लिए नहीं, समाज के लिए, धर्म के लिए लड़ा। लड़ाई आज भी हो रही है और रुकेगी कैसे, क्योंकि तीन प्रवृत्तियां हैं — सात्विक, राजसी, तामसी; कब कौन जागृत हो जाए पता नहीं। लड़ाई तो अपने अंदर भी चल रही है — आज जितना फंसे हो, लड़-लड़कर फंसे हो, अंतरात्मा से लड़ाई हो रही है। यह तब तक होगी जब तक उस परम सत्ता से मिलना नहीं होगा, जब तक आत्मदर्शन नहीं होगा। लड़ाई तभी बंद होगी जब आप कहोगे "मुझे कुछ नहीं चाहिए" — लड़ने वाला ही खत्म हो गया। कुछ चाहिए तो लड़ाई तो होनी है।
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