प्रश्नोत्तर P17-0081 · भाग 17
गुरु जी, सेवा कितने तरह की होती है? और आत्मदर्शन के बाद व्यक्ति की व्यवस्था कौन करता है?
सेवा तीन तरह से होती है — धन सेवा, तन सेवा और मानसिक सेवा। मानसिक सेवा पर तब पहुंचोगे जब आत्मदर्शन होगा; अभी तो मन कामनाओं में लगा है। आत्मदर्शन के बाद वह बस बैठे-बैठे समाज के लिए सोचता है, उसकी ऊर्जा, उसका वाइब्रेशन समाज में जाता है और काम होने लगता है, वह बोले या ना बोले — क्योंकि उसकी कोई कामना नहीं रही, उससे जो करवाना है प्रकृति करवाएगी, उसकी सारी व्यवस्था प्रकृति करेगी। जैसे कोई अधिकारी पद पर बैठ जाता है तो बस कहता है "मुझे यहां जाना है" और गाड़ी, पेट्रोल, सब व्यवस्था सिस्टम करता है, वह मना करे तो भी — क्योंकि अब वह संविधान के दायरे में पूरे देश का हो गया, उसका जीवन व्यक्तिगत नहीं रहा। लेकिन कुछ साल पहले वह खुद गाड़ी पकड़ता था; उस पद के लिए उसने मेहनत की, योग्य बना, तब हुआ। ऐसे ही आत्मदर्शन करने वाले की देखभाल प्रकृति करती है — वह निमित्त रहता है, पाप-पुण्य से परे; करवाओ तो ठीक, ना करवाओ तो ठीक।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21