प्रश्नोत्तर P17-0099 · भाग 17
गुरु जी, अंतर में कैसे उतरें?
बस बाहर से अपने आप को छुड़ा लो, उतर जाओगे — उतरना थोड़ी पड़ेगा, कोई ऑप्शन ही नहीं रहेगा। बाहर कहीं-कहीं उतरना बंद कर दो, क्योंकि इस जगत में जो भी है परिवर्तनशील है; अपने आप को छुड़ा लो, सीधी-सिंपल बात है और आप ही के हाथ में है। प्रयास करोगे तो कोई सहायता करेगा — बोझा उठवा सकता है, लेकिन ढोना खुद पड़ेगा; गठरी आपने बांधी है, तो ढोएगा कौन? नहीं तो जन्म-जन्म भोग-भोजन में घूमते रहो। स्व में होकर जियो, जीवंत होकर जियो — यह बहुत आसान है, किसी से प्रार्थना भी नहीं करनी, बस उम्मीद से मुक्त करा लो। मेरे बस में होता तो अब तक कितनों को करवा देता — यह अधिकार किसी को नहीं दिया गया, आप ही को दिया गया है; कोई आंतरिक ऊर्जा से, ज्ञान से, सत्संग से सहयोग कर सकता है, लेकिन जब आप प्रयास करोगे तब।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21