प्रश्नोत्तर P17-0120 · भाग 17
गुरु जी, "सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार" — इसका सही अर्थ क्या है?
लोग इसका अर्थ निकालते हैं कि कोई तीर्थ मत करो, बस गंगासागर कर लो — लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है। मतलब है — सब तीर्थ बार-बार करते रहो, और गंगासागर आखिरी में एक बार करना, जब राग-द्वेष से मुक्त हो जाओगे; क्योंकि वहां तुम मिट जाओगे, तुम तुम नहीं रहोगे। तब तक घूमते रहो जब तक अहम भाव खत्म ना हो जाए। लिखा कुछ और गया, हमने अपने तरीके से समझ लिया।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21