आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P17-0195 · भाग 17

गुरु जी, बचपन में मां-बाप और भाई-बहनों से जो वादे होते हैं — "हम कभी अलग नहीं होंगे", "मैं तुम्हारे बुढ़ापे का सहारा बनूंगा" — और फिर कोई अध्यात्म के रास्ते पर आ जाता है, तो क्या आत्मज्ञान के बाद भी उन वादों की भरपाई करनी पड़ेगी?

हां, अगर उस वादे के सहारे उसने उनसे कुछ लिया — चापलूसी करके — तो भरपाई करनी पड़ेगी; अलग रूप सामने आएगा, पर भरपाई कहीं न कहीं करनी पड़ेगी। जैसे बच्चा मां को पटाकर, जिद करके सौ रुपये ले लेता है — वह भी भोगना पड़ेगा; एक-एक शब्द का हिसाब देना पड़ेगा। अधिकार है तो अधिकार से मांगो, चापलूसी करने की क्या जरूरत है? और मां को भी पता है कि अभी इसे कुछ चाहिए — घुमा-फिराकर वे भी कहीं भोग रहे हैं, तुम भी कहीं भोग रहे हो।

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