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प्रश्नोत्तर P18-0065 · भाग 18

गुरु जी, आपने बताया था कि आप फटे कपड़ों में बड़े होटलों, AC, ट्रेन और प्लेन में गए और खुद को मापा — ऐसा क्यों किया, और हम अपनी स्थिति कैसे जांचें?

स्वाभाविक जीवन में देखो कि हर चीज में रस आ रहा है या नहीं — जांचना हो तो बड़ा आसान है। मैं होटल, AC, प्लेन में जाता था तो सब मुझे देखते थे, क्योंकि उनके साथ बैठता था; भीख मांगता तो कोई नहीं देखता। आदमी का पहला शौक भोजन, फिर कपड़ा, फिर मकान — इसलिए फटे कपड़ों में 500-1000 का खाना खाओ तो लोग, वेटर, मैनेजर अलग तरह से देखते हैं। एक बार एक महाराज जी को होटल में रोक दिया कि पैसे नहीं होंगे — मैंने पूछा, आप कौन होते हो सोचने वाले, सबसे एडवांस लेते हो क्या? ट्रेन में टीटी, RPF और वेटिंग रूम वाले भी कपड़े देखकर रोकते थे, फिर टिकट देखकर सॉरी बोलते। टिकट जांचना उनका काम है — टिकट है तो जांचो, नहीं है तो फाइन करो — पर कपड़े देखकर रोकने का अधिकार नहीं। मैं ऐसे ही नहीं घूमा; जांचना चाहता था कि लोग किस तरीके से काम करते हैं और व्यक्ति में क्या देखते हैं, क्योंकि मुझे संसार में काम करना है — झोपड़ी वाले और अरबपति, नीचे वाले और ऊपर वाले, दोनों को एक जगह बैठाना है। उस कपड़े में दोनों ने मुझसे खुलकर बात की। मैंने देखा कि सब आवरण में फंसे हैं, आवरण के पीछे कोई जा ही नहीं पा रहा; जब तक आवरण के पीछे नहीं जाएगा, अपने होने का पता कैसे चलेगा? इसलिए कई साल फटे कपड़ों में घूमना पड़ा। यहां देखो — किसी का बैकग्राउंड नहीं पूछा जाता, करोड़पति हो या कोई, सब साधक बनकर एक जगह बैठते हैं।

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वीडियो: आत्मज्ञान किस स्थिति में होता है ? #aadhyatmik_satsang #livesatsang #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2025-01-03