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प्रश्नोत्तर P18-0120 · भाग 18

गुरु जी, मुझे पहले आत्मज्ञान जैसा अनुभव होता था — प्रश्न उठते ही अंदर से उत्तर मिल जाता था — लेकिन यहां (कुटिया) आने के बाद वह अनुभव खत्म हो गया; ध्यान में भी नहीं मिलता। वह कहां चला गया?

मैं क्या कहता हूं — कुछ नहीं चाहिए में आ जाओ। यहां रहने का मतलब है खत्म हो जाना; यहां सिर्फ तुम ही बचोगे, और कुछ नहीं बचेगा। अगर कुछ बचाना है तो यहां से निकल लो — इसीलिए मैं किसी को रोकता नहीं, कोई बचाकर भी जा सकता है। एक साधक दक्षिण से आया था, बोला "मैं तो खत्म हो जाऊंगा", तो मैंने कहा यह बात मैं पहले ही कह चुका; उसे नाश्ता कराकर विदा किया। इसीलिए लिखा है — बेमतलब से आना नहीं, मतलब है तो आना नहीं। यहां आंतरिक व्यक्ति खत्म हो जाता है; जितना कचरा था सब निकल जाता है — जैसे कोरा कागज।

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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22