प्रश्नोत्तर P18-0122 · भाग 18
गुरु जी, अगर किसी को ना कहना हो और उसकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का दुख हो (क्योंकि हम उससे प्यार करते हैं), तो ईमानदारी से जीते हुए ना कैसे कहें?
अगर ईमानदारी से जीना है तो ना कहना है तो ना ही कह दो। क्योंकि हां कहने में आपका भी भटकाव है और आप उनके साथ भी धोखा कर रहे हो — उनके लिए धोखेबाज तो मत बनो। कभी जीवन में उन्हें समझ आएगा तो बोलेंगे कि वह व्यक्ति सही था। हां, ना एक मर्यादा में कहें — संबोधन में मर्यादा हो, कहने का एक तरीका होना चाहिए।
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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22