प्रश्नोत्तर P18-0181 · भाग 18
गुरु जी, जब आत्मा का कोई स्वभाव ही नहीं, तो वह अपने मूल (आनंद) की ओर जाना क्यों चाहती है?
इसलिए कि यह बना-बनाया स्वभाव कामनाओं में, मान के चक्कर में, इच्छा-अपेक्षा में आकर आत्मा जीवात्मा हो गई और अब परेशान हो गई। जैसे पानी फ्रिज में गया तो बर्फ बन गया, पर बर्फ का अस्तित्व रहेगा नहीं, उसे मिटना ही है और मूल पानी में आना है — चाहे आइसक्रीम बनाकर बाजार में बेच दो। वैसे ही हम कामनाओं में बिक रहे हैं; बिकते-बिकते थक गए तो समझ आई कि लेनदेन से कैसे मुक्त हो जाऊं — जिस दिन लेनदेन से मुक्त हो गया उस दिन सौ प्रतिशत अपने मूल में आ जाऊंगा। आत्मा परमात्मा से मिलने के लिए वैसे ही बेचैन रहती है जैसे बच्चा मां से मिलने के लिए; घर लौटने जैसा सुकून वहीं मिलता है। आनंद आत्मा का स्वभाव नहीं, वह तो उसका मूल है ही।
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वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29