प्रश्नोत्तर P18-0185 · भाग 18
गुरु जी, किसी से मिलने पर कभी पॉजिटिव वाइब और खुशी, तो कभी अंदर से दुख का भाव क्यों होता है?
इसलिए कि जिसके लिए आप गए थे वह नहीं हो रहा, तब निराशा, दुख, पीड़ा होगी; और जिसके लिए गए थे वही मिल रहा है तो पीड़ा नहीं होगी। कामना रखे बिना तो आप जा ही नहीं सकते — अभी कामनाओं में जी रहे हो; निर्विकार होने की कामना, अपने प्रश्न के उत्तर पाने की कामना तो रखनी ही पड़ेगी। बिना कामना जाना परम स्थिति पर, आत्म दर्शन के बाद ही हो सकता है। पहले कामनाओं के लिए जा रहे थे, अब कामनाओं से मुक्त होने के लिए जा रहे हो — फर्क इतना है कि यह कामना आपको आपसे मिलाएगी, वह कामना संसार में भटकाएगी। सारा खेल भाव का है — भाव विद्यते देवा।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: स्वाभाविक आत्मा का गुण क्या है / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-29