प्रश्नोत्तर P19-0085 · भाग 19
गुरु जी, बाहर से सब लोग अलग-अलग दिखते हैं; यह अंतर हमें कब और कैसे फंसा देता है?
बाहर रूप की वजह से सब अलग दिखते हैं, पर रूप के पीछे जाओ तो एक ही मिलेगा। यह अलगाव एक समय नहीं था और एक समय बाद नहीं रहेगा — यह भ्रम है। अलग-अलग दिखने से भी कोई तकलीफ नहीं; अभी यहां बैठे लोगों से आपको ना राग है ना द्वेष। पर जैसे ही आपने किसी से कुछ मांगा, फंस गए — जिसने दिया उससे राग, जिसने नहीं दिया उससे द्वेष। सब दे दें तो भी राग में फंस गए, उनके पिंड में घुस गए कि "यह आदमी बहुत अच्छा है"। इसलिए उम्मीद से अपने आप को मुक्त कराओ — उम्मीद ही दुख है, उम्मीद ही सुख है। जिनसे आपने कुछ लिया-दिया नहीं, उन्हें छोड़ने में ना दुख होगा ना सुख, कुछ अलग ही होगा; आंखों में आंसू आएंगे और पता नहीं होगा क्यों, क्योंकि पहली बार बेमतलब जिए।
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वीडियो: भगवान और परमात्मा में क्या अंतर है ?#yogijikasatsang #प्रत्यक्षज्ञान #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-07-19