प्रश्नोत्तर P20-0009 · भाग 20
गुरु जी, शरीर अपने आप चल रहा है यह समझ आया, पर शरीर और चलाने वाले को अलग नहीं देख पाता — क्या करूं?
शरीर तो अलग है ना, आप तो सिर्फ निमित्त हो; यह अपने आप जरूरत में चलता है। अब उस जरूरत को आप ईमानदारी से पूरा करते हो या बेईमानी से — यह आपके ऊपर है। ईमानदारी से किया तो स्तर ऊपर गया, बेईमानी से किया तो नीचे; ईमानदारी से मुक्ति। जरूरत तो किसी न किसी तरीके से पूरी करोगे ही — एक में गिरना है, एक में उठना।
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वीडियो: ब्रह्म जीव और माया में क्या भेद है ? #yogijikasatsang #aadhyatmik_satsang #livesatsang #gyan · 2024-12-26