प्रश्नोत्तर P20-0034 · भाग 20
गुरु जी, क्या आत्मज्ञान से पहले जीवन में सिर्फ दुख ही लिखा होता है?
नहीं। आप जो भी करते हैं उसका परिणाम देखिए — संयोग है तो वियोग है। सामान लिया तभी पता था टूटेगा; घर बनाया तभी पता था गिरेगा; कपड़ा खरीदा, एक दिन फटेगा; विवाह किया, तभी पता था दो में से एक कभी न कभी जाएगा। सब पता है, फिर दुखी क्यों? गाड़ी ली तो कभी भी लड़ सकती है — दुख नहीं चाहिए था तो गाड़ी ही न लेते। जो भी करते हैं उसका एक परिणाम दुख है; उसे पहले से स्वीकार भाव में रख दीजिए। मन जानत है, मन मानत नहीं।
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वीडियो: ब्रह्म जीव और माया में क्या भेद है ? #yogijikasatsang #aadhyatmik_satsang #livesatsang #gyan · 2024-12-26