आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P20-0141 · भाग 20

गुरु जी, कई साल पहले मुझसे गलती हुई — एक गुरु ने सरेंडर करने को कहा, मैंने नहीं किया, वे चले गए; अब भी मन में घुटन है, क्या करूं?

गलती तुमने की, तुम्हारा क्या भाव था, क्या संशय था, यह तुम्हें ही पता है — कुछ तो सोचकर ही बोला होगा, तो फिर भोगो। जब वे थे तभी माफी मांग लेनी चाहिए थी, और क्षमा तब तक मांगनी चाहिए जब तक वे क्षमा न करें — पूछना चाहिए था कि मुझे माफ किया कि नहीं। अब पश्चाताप करते रहो; ईमानदारी और सत्कर्म से जीवन जियो, कभी न कभी भरपाई हो जाएगी तो अपने आप निकल जाएगी। आध्यात्म में आगे बढ़ते रहो और अपना आत्मिक कल्याण करो।

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वीडियो: ऐसा क्या करूं, जो तेरी सेवा हो पाए ? #योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-02