प्रश्नोत्तर P20-0146 · भाग 20
घर में बिना मेरी गलती के अपमान होता है, दिल पर ठेस लगती है, भोजन भी जहर लगता है, न वह जगह छोड़ पाती हूं न मुक्त हो पाती हूं — ऐसे में क्या करूं?
वहां आप जिद और हठ योग में चले जाते हो — अपमान देखकर कोई फैसला ले लेते हो और उस पर टिके रहते हो, मर भी जाएं तो चलेगा। किसी की व्यक्तिगत स्थिति पर सलाह नहीं दी जा सकती, क्योंकि हो सकता है उसे भ्रम हो गया हो; फैसला वह खुद ले। पर मैं तो कहूंगा — ऐसे लोगों के बीच नहीं रहना चाहिए, उन्हें छोड़ देना चाहिए। मरना क्यों? हमें मरना नहीं चाहिए, जिंदा रहकर उन्हें करके दिखाना है कि मेरी क्षमता यह है, तुम समझ नहीं पाए, गलती तुम्हारी थी। चाहे मेल हो चाहे फीमेल, कोई फर्क नहीं पड़ता।
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वीडियो: ऐसा क्या करूं, जो तेरी सेवा हो पाए ? #योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-02