प्रश्नोत्तर P20-0165 · भाग 20
हम संस्कार के नाम पर बच्चों पर आवरण चढ़ाते हैं — आवरण से आगे बढ़कर अपने तक कैसे पहुंचें?
इतने सारे लेयर बच्चों पर संस्कार के नाम पर चढ़ा दिए; हकीकत में संस्कार क्या है, किसी को पता ही नहीं। हम आवरण देखकर आदमी से बात करते हैं, यही गड़बड़ी है — जरा पहुंचो कि आवरण के पीछे कौन है, फिर उसके पीछे कौन है। जब तक आवरण का प्रभाव खत्म नहीं होगा, आप अपने आप तक पहुंच ही नहीं पाओगे; हम बाहर के प्रभाव देने-लेने में फंसे हैं। यह जगत परमात्मा का है, इसमें फंसना नहीं, जीना है — फंसना तो बस तुम्हारे जगत में है, जो तुमने अपने तरीके से बनाया है।
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