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प्रश्नोत्तर P20-0192 · भाग 20

इच्छा-अपेक्षा छोड़कर स्व में आ भी गए, पर अगर वह फिर से इच्छा-अपेक्षा पैदा कर ले तो?

इच्छा-अपेक्षा आती नहीं, वह पैदा करता है — तो पैदा मत करो, पैदावार बंद करो, यह आपके बस में है। करोगे तो फंसोगे। कोई ईमानदारी अपनाकर मुक्त हो गया और कहे मैं फिर से बेईमानी करूंगा, तो फिर वहीं आओगे। कोई गटर में गिरा, उसे शुद्ध जगह स्नान करा दो और वह कहे मैं फिर गटर में जाकर नहाऊंगा — अशुद्ध हो जाओगे, कोई क्या करे? आपको निकलने का मार्ग बताया जा रहा है; निकलना है तो उपयोग करो, नहीं तो मत करो। जिसको मोक्ष चाहिए वह यह काम करेगा; कोई आपको विवश नहीं कर सकता। जितनी आपकी सामर्थ्य है उतना काम करो; सामर्थ्य से ज्यादा करोगे तो कोई सहयोग करेगा, और सहयोग होते ही राग-द्वेष में गए — सामर्थ्य में न राग होगा न द्वेष। क्यों योग्यता से ज्यादा चाहिए? जो चाहिए उसके लिए योग्य बनो, खुद मेहनत करो।

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वीडियो: इच्छा अपेक्षा क्या है?इससे कैसे मुक्त होते है?(Freedom from Desire & Expectation) Explained in Hindi · 2026-03-07