प्रश्नोत्तर P20-0194 · भाग 20
श्वास का भीतर-बाहर आना-जाना तो कुदरती है, उसमें कोई अपेक्षा नहीं — फिर मृत्यु क्यों हो जाती है?
आपको इतना पता होना चाहिए कि मृत्यु है ही नहीं — यह तो इच्छा-अपेक्षा की मृत्यु है; न जन्म है न मृत्यु। शरीर का नाश नहीं होता, रूप का नाश होता है — शब्द एक जाल है, एकदम सोच-समझकर सुनो, बोलो और समझो। शरीर और रूप अलग-अलग हैं; यहां कुछ भी नाश नहीं किया जा सकता, बस रूप का नाश होता है — जो पहले नहीं था, अभी है, बाद में नहीं रहेगा। शरीर का तो रूपांतर हो जाएगा, उसका अस्तित्व रहेगा; रूप का अस्तित्व नहीं रहेगा। इसीलिए कहा गया जगत मिथ्या — जीव किसी शरीर में नहीं, रूप में फंसा है, मिथ्या में फंसा है। इसे गहराई से समझकर बुद्धिमानी से अपने आप को निकालो।
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वीडियो: इच्छा अपेक्षा क्या है?इससे कैसे मुक्त होते है?(Freedom from Desire & Expectation) Explained in Hindi · 2026-03-07