आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P21-0054 · भाग 21

गुरु जी, कर्म तो मुझे देश-काल-परिस्थिति में अपनी जरूरत के लिए या किसी और के लिए करना ही पड़ेगा — तो मैं क्या करूं कि कर्ता का भाव और मेरा का भाव न बंधे?

यह कर्म भूमि है, यहां बिना किए आप रह ही नहीं सकते। मैं इस पिंड में आया, फिर इस पिंड की जरूरत थी। जरूरत में मैं बाहर गया — कभी मां मिली, कभी बाप मिला; जो लोग मेरी जरूरतें पूरा करने लगे वो मेरा बनने लगे। जरूरत तक तो कोई तकलीफ नहीं, ना बेचैनी, ना घुटन, ना किसी से राग, ना द्वेष। फिर जैसे ही समझने लायक हुआ, देखा ये बड़ा आदमी है, ये छोटा; तो इच्छा जगी मैं भी बड़ा बन जाऊं। पहले मेरा बनाया जरूरत के लिए, फिर सुख-स्वाद के चक्कर में। सुख तब मिलता है जब मेरा से मैं लेनदेन करता हूं — किसी ने पूछा भोजन कैसा है, हमने कहा अच्छा, तो उसे भी सुख, मुझे भी; कहा बुरा तो उसे भी दुख, मुझे भी — मैं राग-द्वेष में फंस गया। तो कुछ भी लेनदेन करूं तो ठीक शब्द का प्रयोग करना है। भोजन कैसा बना? ठीक। ठीक में राग-द्वेष दोनों नहीं आएगा, सामने वाले के अहमभाव को कोई पोषण नहीं मिलेगा, और ठीक में कोई बंधन नहीं है, क्योंकि मिलने में बंधन है। "ठीक है" भी मत बोलना, तुम कुछ जोड़ मत देना — जैसा है वैसा स्वीकार करके अपनाओ। दूसरा — किसी ने पूछा ये काम कब तक हो जाएगा, मैं टाइम दे देता हूं; टाइम देना ही बंधन है, क्योंकि काम मेरे शरीर के द्वारा और अनेक साधनों के द्वारा हो रहा है; हो सकता है अगले सेकंड शरीर छोड़ना पड़े, साधन ही धोखा दे दे। संभावना में बात करो, अनुमान मत लगाओ, तुक्का मारना बंद करो। जब परिणाम आ जाए तब बोलो — ये देखो परिणाम है; तब अहमभाव खड़ा ही नहीं होगा, कर्ता का भाव बनेगा ही नहीं। ठीक शब्द का प्रयोग करो, अनुमान लगाना छोड़ दो, संभावना में बात करो, परिणाम आने पर परिणाम बता दो — ये प्रत्यक्ष ज्ञान का मूल मंत्र है। इसे अपनाते ही छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, पाखंड भी नहीं होगा तुमसे — ईमानदारी अपने आप हो गई। फिर धीरे-धीरे सत्कर्म करोगे तो पिछले का नाश होगा और एक दिन उस मूल परम आनंद को उपलब्ध हो जाओगे। फिर हंसना और रोना दोनों चला जाएगा, सिर्फ मुस्कुराहट रह जाएगी — आदमी हंसता-रोता किसी और के लिए है, मुस्कुराता अपने लिए है। लेकिन हां, आप अकेले रह जाओगे; वाहवाही नहीं करोगे तो लोग सिर्फ काम की बात करेंगे।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: हरियाणा सोनीपत में पुनः सत्संग 20 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-20