आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P21-0063 · भाग 21

गुरु जी, घुटन तो अभी भी है, क्योंकि रहना उन्हीं के साथ है जो इस मार्ग पर नहीं चल रहे — इसी घुटन की वजह से क्या लोग भक्ति मार्ग की तरफ ज्यादा मुड़ जाते हैं?

ये तो शुरुआत है, जैसे-जैसे आप इधर बढ़ोगे ये घुटन बढ़ती जाएगी। हां, उनमें सहने की इतनी हिम्मत नहीं होती तो टूटकर वो भक्ति मार्ग में चले जाते हैं। भक्ति मार्ग, क्रिया मार्ग, योग मार्ग, ध्यान मार्ग — सबसे कम साधक ज्ञान मार्ग में हैं। इसमें तुम्हारे अलावा कोई नहीं है, गुरु भी शब्द रूप में है, शरीर रूप में नहीं। बाकी मार्ग कहते हैं धीरे-धीरे छूट जाएगा, ज्ञान मार्ग कहता है — छोड़ तो आ, नहीं तो मत आ। किसी भी मार्ग से जाओ, आखिर में ज्ञान ही चाहिए; भक्ति में इष्ट के द्वारा भी ज्ञान ही तो चाहिए। ज्ञान मार्ग सबसे तेज तो है, लेकिन खतरनाक भी है — एक झटके में ऊपर ले जाता है तो एक झटके में नीचे भी; जैसे पैदल वाला गिरे तो कम चोट, जहाज वाला गिरे तो पता नहीं बचे कि नहीं। इसलिए जितने शब्द बोल रहे हो उसमें जीना पड़ेगा, उसमें चूकना नहीं। ज्ञान मार्ग में बैकग्राउंड काम नहीं करता, सिर्फ आपसे मतलब है — धोखे से आ भी गए तो टिकोगे नहीं। इससे आप इसी जन्म में निकल सकते हो।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: हरियाणा सोनीपत में पुनः सत्संग 20 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-20