प्रश्नोत्तर P21-0064 · भाग 21
गुरु जी, आपने कहा था कि इस मार्ग पर एक प्रतिशत ही पहुंच पाते हैं, और यह भी कि बुद्ध के बारे में पहले से पता था कि वे बुद्ध होंगे — तो क्या परमात्मा ही वह एक प्रतिशत लोग भेजता है? फिर सत्कर्म क्या है?
परमात्मा भेजता है — ऐसा नहीं है, सब अपने कर्मों से। अष्टावक्र को गर्भ में ही ज्ञान था, तो वो पीछे का ही था ना; बुद्ध को तो बाद में हुआ, प्रयास के बाद। लक्षण पता चल जाता है, लक्षण भी हमारे कर्म से ही आया है — शरीर पर लक्षण होते हैं वो हमारे कर्म से ही आते हैं। उन्होंने संभावना व्यक्त की कि ये महात्मा बनेंगे; पक्का तो तब हुआ जब वो साधना करके उस स्थिति पर आए। ध्रुव ने छह-सात साल में भगवत प्राप्ति की — शरीर ना देखो, उसने पीछे मेहनत की। इसलिए मुझे कर्म बदलना है; जितना भी कुछ होता है मेरे कर्म से ही होता है। परमात्मा कर्ता से परे है। यह दुनिया अपनी जरूरत में चल रही है, और जरूरत में हम बेईमानी कर रहे हैं तो फंस रहे हैं — जितने लोग जेल में हैं, पैदा होते ही जेल थोड़ी गए, अपने कर्मों से गए। यहां कर्म का परिणाम मिलता है।
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