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प्रश्नोत्तर P21-0085 · भाग 21

गुरु जी, आपने कहा शब्द पकड़ो, शब्द वहां तक ले जाएगा — पर शब्द जहां से आएगा वहीं तक ले जाएगा ना? शब्द बुद्धि के तल से, मन के तल से निकल रहा है, तो क्या वह उस निराकार तक ले जाएगा जहां कोई शब्द है ही नहीं?

आत्मा से निकल रहा है तो तुम्हें आखिर तक लेकर जाएगा — कहां तक? तुम तक; और तुम्हारे बाद शब्द खत्म, क्योंकि शब्द किसी और के लिए है। ये शब्द इसलिए निकल रहे हैं कि आप इस संसार से कैसे छूट जाओ; जैसे ही ये शब्द तुम्हें छुड़ा देंगे, ये शब्द खत्म। फिर तुम स्वयं के द्वारा उस परम सत्ता तक पहुंचोगे — धारणा, ध्यान, समाधि। ये शब्द बुद्धि ग्रहण कर रही है; इंद्रियों द्वारा, बुद्धि से समझ रहे हो, और बुद्धि द्वारा अपने आप को बाहर से छुड़ाओगे जहां फंसे हो; फिर बुद्धि का काम खत्म, आप स्व में स्थिर हो गए। स्वयं में स्थिर होने के बाद उस परम सत्ता की यात्रा शुरू होती है — बूंद जान ले कि मैं पानी हूं, उसके बाद यात्रा शुरू। अभी तो हम छूटने की यात्रा कर रहे हैं; जब अपने आप को निकाल लेंगे और स्व में स्थिर हो जाएंगे, फिर प्रयास खत्म, अपने आप यात्रा होगी। प्रयास तभी तक करना पड़ेगा जब तक आप बाहर से छूटे नहीं।

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