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प्रश्नोत्तर P21-0086 · भाग 21

गुरु जी, ममता को कैसे रोकें — मोह से कैसे बाहर निकलें?

उससे कुछ मिल रहा है, वो लेना छोड़ दे। मोह हमें किससे होता है? जिससे हमें कुछ मिलता है — चाहे शब्द द्वारा, दृश्य द्वारा, गंध द्वारा, रस द्वारा, स्पर्श द्वारा; पांच इंद्रियों द्वारा मुझे कुछ मिलता है, उसके प्रति मोह हो जाता है। ये पांचों पहले मुझे मां से मिलते हैं — स्तनपान, स्पर्श, आवाज, सुगंध, रूप — इसलिए बचपन में मां को हम नहीं छोड़ते। जवानी आई तो पत्नी से मिलता है, पत्नी को पति से; फिर अपने पुत्र से पांचों मिलते हैं — अपना बच्चा संडास भी कर दे तो गंदा नहीं लगता, दूसरे का करे तो नाक दबाएंगे। भोजन में चार मिलते हैं, बाकी में तीन, दो, एक। तो जीव सबसे ज्यादा तीन जगह फंसा है — मां, पत्नी, बच्चे। मुझे कुछ मिलता है, उस मिलने से उससे मोह है, ना कि सीधा उससे मोह है — लालच की वजह से। तो मिलने की इच्छा छोड़ दो तो मोह, मान, ममता खत्म; जब तक मिलने की इच्छा है तब तक आप उसे छोड़ ही नहीं सकते। और ये शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श शरीर तक है — तो समझ के उसको छोड़ो कि भाई अब कुछ नहीं चाहिए, अब तो मेरी बारी आ गई।

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