प्रश्नोत्तर P4-0161 · भाग 4
(वही साधिका) 2011 में आपका यह क्वेश्चन था — तो 2010 से पहले यह क्वेश्चन आपने कहां से उठा लिया था? हम तो इतनी साधना किए नहीं, तो 'आत्मज्ञान चाहिए' कहना हमें बकवास जैसा लगता है।
देखिए, पहले तो मैं निकला भगवान-परमात्मा (के लिए), शुरुआत में; फिर इसके बाद पता नहीं कैसे हो गया — अब याद भी करूं कि कहां से आ गया, मैं बोल नहीं सकता; कहीं ना कहीं जग गया होगा। मैं इसी पे रुक गया था कि आत्मज्ञान कैसे। (और) मैं यह नहीं कहता था कि (आत्मज्ञान) चाहिए, कि आत्मज्ञान करा दो। नहीं — 'आत्मज्ञान कैसे?' मैंने कभी ये नहीं कहा कि तुम करा दो। कैसे हो, पद्धति बता दो मुझे, मैं करके देखूंगा; मेरे उत्तर दो मुझे, मैं प्रश्न पूछूंगा — आत्मज्ञान कैसे हो? तो तुम बताओगे — ऐसे होगा। जैसे बता दिया 'समर्पण से', तो (मैं पूछूंगा) समर्पण कैसे हो? तो जैसे वो बताया, तो ये कैसे हो? तो आखिरी में कह देता था — चले जाओ। तो बोला, ठीक है, जा रहा हूं, और प्रश्न वही खड़ा का खड़ा रह गया। मैंने कभी ये नहीं कहा कि मुझे आत्मज्ञान करा दो। मैं कहता था — कैसे होगा? मैं करूंगा ना मेहनत, ये काम मैं करूंगा; आप मुझे बस मार्ग बताएं, मेरे प्रश्न के उत्तर दें — मेरे प्रश्न के उत्तर ही मुझे पहुंचा देंगे।
और बाहर वो कुछ भी करता था — मेरे सामने गांजा भी पीते थे लोग, (और) मुझे बताने की कहते थे — मैं कोई मतलब नहीं रखता था। तुम गांजा पियो, दारू पियो, मुझसे कोई मतलब नहीं; ये तुम्हारी पर्सनल लाइफ है। तुमने मुझे कहा है कि मैं बता दूंगा — इतना कम नहीं है मेरे लिए। अब ये जिम्मेदारी तुम्हारी है, और मैं तुमसे पूछता रहूंगा — तुम मुझे बर्दाश्त कर पाए तो बता ही दोगे; जिम्मेदारी ले ही ली है, तो तुम्हें तो निभाना पड़ेगा। मैं तो तुम्हारे भरोसे हो गया, तुम जानो, तुम्हारा काम जाने — या तो मुझे ना कहो। तो मुझे कभी 1% का भी शक नहीं हुआ, संशय नहीं हुआ। मैं कौन होता हूं संशय करने वाला? उसकी पर्सनल लाइफ है, वो कुछ भी करे, हमें क्या मतलब। बस वो हमें बता दे, प्रैक्टिकल भाई, क्या करना है — ये हम करके देखेंगे। जो चिलम पी रहे थे, हम बैठे रहते थे; उन्होंने (चिलम पी), मैं बोला — इससे क्या होगा? क्या इससे हो जाएगा, जिसके लिए मैं निकला हूं? बोले — नहीं, एक नशा है। तो मैं बोला — नशा करने के लिए मैं निकला ही नहीं हूं। अगर आप कह दो कि इससे हो जाएगा, तो एक हाथ से क्यों, दोनों हाथ से चिलम पियूंगा — हमें तो बहुत तेजी से चाहिए; फिर तो मैं चिलम ही पीता रहूंगा जब तक हो नहीं जाएगा, क्योंकि इसके अलावा मेरे पास कोई काम ही नहीं है।
(साधिका ने कहा, कोई भी बेवड़ा कुछ भी बता देगा तो वही कर लेंगे?) वो आपके लिए बेवड़ा है, मेरे लिए थोड़ी ना। मैं अपने पूरे भाव को आपको बता रहा हूं — मैं वो भी करके देखता, पूरी तरह, क्योंकि मुझे वही चाहिए था, उसके अलावा मुझे कुछ चाहिए नहीं था। मेरा जीने का कोई आधार-बेस नहीं था, और मुझे मिल नहीं रहा था। तो अगर ये व्यक्ति मुझे इस ब्रह्मांड में आश्वासन दे रहा है कि चिलम पीने से हो जाएगा, और मेरे पास कोई ऑप्शन नहीं है, तो कोई तो एक ऑप्शन दिया मुझे। (रिस्क —) रिस्क पे तो जिंदगी खड़ी है। मेरे पास है क्या? क्या आधार है, क्या बेस है? कुछ नहीं है। ये रिस्क भी नहीं है। रिस्क तो तब होता है जब ऑप्शन हो — रिस्क तब था कि भैया, इससे अच्छा रास्ता था, लेकिन वो रास्ता छोड़कर मैंने आपके कहे अनुसार रिस्क ले लिया। मेरे पास तो कुछ था ही नहीं, यार। तुम कहो चरस पिलाओ, अफीम पिलाओ — पिएंगे; और कुछ है तो है नहीं, थक तो गया हूं। कम से कम या तो मुझे ये पहुंचा देगा, या मार देगा। मेरे पास भी कोई ऑप्शन नहीं है। परिवार से लगाव नहीं, नाम-पैसा चाहिए नहीं, आश्रम बनाना नहीं है, गुरु बनना नहीं है, शिष्य बनना नहीं है, नशेड़ी भी नहीं बन पाया, गृहस्थ में जा नहीं पाया — तो (बात ना) करूं तो रिस्क है, फिर जिंदगी तो नर्क हो जाएगी; कम से कम चिलम-गांजा मुझे मार तो देगा, क्योंकि मेरे पास जीने का आधार-बेस नहीं। लेकिन ये पूर्णता से पता हो कि ये पीने से होगा, तभी पियूंगा; नशा मैं नहीं करूंगा। तो उन्होंने हटा लिया, उनकी हिम्मत नहीं हुई कि वो दे दें। मैं पियूंगा तो आत्मज्ञान के लिए ही पियूंगा — ये पक्का है, 101%। रिस्क तो तब है जब मैं बात ना मानूं — इसका मतलब मुझे उसकी चाहत ही नहीं है।
आदमी का सामान जब खोता है ना, और उस सामान की जिंदगी में सबसे ज्यादा जरूरत है, तो कहीं भी ढूंढता है — जहां नहीं खोया है, वहां भी ढूंढता है, हाथी को भी सुई की नोक में ढूंढता है। और उसके पास ऑप्शन है, तो वो नहीं ढूंढेगा, कहेगा चलो इससे काम चलाओ। तो मैं यह कहना चाहता हूं कि मेरे पास ऑप्शन ही नहीं था। अगर मैं नहीं करता तो रिस्क था; जीने का आधार-बेस नहीं था मेरे पास। मैं तो रो रहा था, चिल्ला रहा था। इतना भी समझ में आ गया था कि आत्महत्या भी पाप है, अब वो भी नहीं हो सकता। तो मैं तो कहीं के लायक नहीं रहा। तो बात नहीं मानता तो रिस्क था।
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वीडियो: आखिर मेरा कल्याण कैसे हो ?#योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-30