प्रश्नोत्तर P4-0193 · भाग 4
(वही साधिका) मेरी शादी बचपन में 14-15 साल में हो गई, दो बच्चे हो गए। अध्यात्म में आने के बाद मेरी कोई ख्वाहिश, इच्छा नहीं बची — पति के साथ हूं, पर वो अब भी फिजिकल प्यार चाहते हैं, और मेरा माइंडसेट अध्यात्म में हो गया है, मेरी बॉडी उस चीज को एग्री नहीं करती। तो क्या मेरी जिम्मेदारी बनती है? उनके लिए क्या करूं?
अब देखना ये है कि आपका तो हो गया — उनकी क्या स्थिति है? एक आदमी आपके साथ है — देखिए, आपने विवाह किया है; अगर एक आदमी दुखी है, तो क्यों है? (आपकी) उसकी जिम्मेदारी बनती है। (अगर वो कहें कि हम ऐसे ही रहना चाहते हैं, कोई दिक्कत नहीं —) तो कोई बात ही नहीं ना। तो आप देख लो, सच में ऐसा तो नहीं हुआ — हो सकता है अंदर से दिक्कत हो; वो आपको देखना है। (अगर है भी, तो क्या करूं?) उसके लिए वो करो — शादी वाला — जिसके लिए आप उसकी बीवी हुई हो। आप बात समझिएगा, बहुत गहरी बात है — जिसके लिए वो पति हुआ है, तो फिर देखो, उसका ख्याल रखो।
देखिए, पहले आपको इसे भी जरा गहराई से समझना पड़ेगा — जब हम विवाह करते हैं, तो विवाह क्यों करते हैं? (उसका मतलब) ये कहां आ गया कि शारीरिक संबंध हमेशा ही बने रहें? हमेशा की बात नहीं होती है, बात जरूरत की होती है — उसकी जरूरत है। (बॉडी एग्री नहीं कर रही —) तो आपने जिम्मेदारी ली है। (शादी तो धोखे से हुई, अनजाने में —) मैं जो समझ के कर रहा हूं (वो कह रहा हूं) — तो आप भी उनको वहां लाइए ना; आपका भी कर्तव्य है, आप भी उन्हें लाइए। और कभी ना कभी हम अपने लिए (भी तो) उनके साथ कर रहे थे — समझिए। अब आपकी समझ बढ़ी, तो क्या हम उसके लिए भी तो (कर) सकते हैं? कभी ना कभी तो हमने किया है, तो हम उसके लिए कर सकते हैं। एक समय था, तो हम उसके साथ अपने लिए तो कर ही रहे थे; अब हमारी समझ विकसित हो गई, उसकी नहीं हुई, तो हमारा कर्तव्य है कि हम उसके लिए करके उसको यहां (तक) लाएं।
(कोई जबरदस्ती थोड़ी किसी को ला सकता है —) वो देख लो — आप कुछ बता रहे हो, उसे अपना रहा है कि नहीं। वो अगर नहीं अपना रहा, तो छोड़ दो फिर। लेकिन आप उसका सहयोग करो — अगर वो आपके बताए हुए मार्ग पे चल रहा है, जैसे आपने समझा है वो उसको फॉलो कर रहा है, तब उसे सहयोग करना चाहिए। (उसे सहयोग की जरूरत नहीं, जैसे मैं निकल गई वो भी निकल जाएगा —) आप भी निकलीं, तो कहीं ना कहीं से सहयोग हुआ है; बिना सहयोग के हम आगे नहीं जा सकते। मैं स्त्री की बात नहीं कर रहा हूं, मैं पुरुष की भी बात कर रहा हूं — मैं कोई स्त्री-पुरुष की बात नहीं (कर रहा); मैं जिसके साथ जीता हूं, अगर मैं आगे निकला, तो मेरा कर्तव्य है, जिम्मेदारी है उसको ही लेके चलना। अगर वो नहीं आता है, तो छोड़ दो, फिर उसको उसके हाल पे छोड़ दो — एकदम छोड़ दो, क्योंकि नहीं तो आप वहीं रुक जाओगे। आप उस जगह हो — अगर वो आगे नहीं आ रहा है, तो उसका त्याग कर दो; अगर आगे आ रहा है, तो उसका सपोर्ट करो, मतलब सहयोग करो। (अगर वो कहे कि इस कंडीशन में भी मैं रह लूंगा —) तो फिर तो कोई दिक्कत नहीं है। अगर वो कहता है कि मुझे किसी भी परिस्थिति में तुम्हारे साथ ही रहना है, तब तो फिर कोई दिक्कत नहीं है — वो तो प्रेम है। फिर देखो, (वो) लायक क्या है — सामने वाले का प्रेम है, या डर है। आप देख लो, क्योंकि आप वहां हो।
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वीडियो: अगर भक्त न हो तो भगवान का क्या होगा ? क्या भगवान भक्त पर निर्भर हैं ? #bhakt #bhagvan · 2025-07-17