प्रश्नोत्तर P5-0099 · भाग 5
ईमानदारी से चल रहे हैं पर अड़चनें आती हैं, मन अशांत — क्या करें? निगेटिव थॉट्स आते रहते हैं।
बस ईमानदारी से जीवन जीते हुए सत्कर्म करें, और मेहनत करें, और आगे बढ़ें।
मन में निगेटिव थॉट्स आते रहते हैं। थोड़ा घबराहट आ रही है। ऐसा विचार आ रहा है, कुछ फेंकने के लिए, चलाने के लिए, गाली देने के लिए। तो आने दो। प्रभावित मत होइए। आप इतना तो कर सकते हो। आ रहे हैं, आ रहे हैं। मैं जा रहा था, रास्ते में गटर आ गया। क्या करोगे, गटर में कूदोगे कि अपना आगे निकल जाओगे? गटर से प्रभावित हो क्या आप? अप्रभावित रहकर क्या करोगे? तो प्रकृति की व्यवस्था है। जनरल थॉट आदमी को चलित करता है। नहीं होना चाहिए। नहीं होने के लिए क्या करना है? मतलब बस आ रहा है, आने दीजिए। उसके जिम्मेदार आप नहीं हो।
आप जा रहे थे, रास्ते में गटर दिखा, बदबू आई। उसके जिम्मेदार आप हो कि प्रकृति है? आप नहीं। बस खत्म बात। आपने अपने आप को जिम्मेदार मान लिया। विचार आ रहे हैं, वह गलती आपकी है। बेमतलब का मान लिया। हवा आ रही है, उसके जिम्मेदार आप हो क्या? यह मेरा मन, मेरे अंदर से आ रहा है, मेरा सोच, मेरा विचार, मेरा थॉट। आपके पास तो एक भी विचार नहीं है। सब विचार बाहर के हैं। मेरे अंदर से आ रहा है, कहां से अंदर से आ रहा है? विचार कहां से पैदा होते हैं, बाहर से कि अंदर से? देश, काल, स्थिति, परिस्थिति में हमारे विचार बदलते हैं, उड़ते हैं, आते हैं, जाते हैं। उसके जिम्मेदार हम थोड़ी हैं। आपको किस पर काम करना है, वह देख लो।
फिर आप दुकान पर गए। सामान बहुत दिखाया। क्या सब सामान का पैसा लेगा? आप कहोगे, यह मुझे दे दो, पैक कर दो। उसका मूल्य लेगा। और आप कहोगे, नहीं, मुझे कोई पसंद नहीं। कहेगा ठीक। उसकी कोई फीस है क्या? बोलेगा नहीं, देखने का चार्ज नहीं लगता। वैसे ही विचार है। अगर ऑप्शन ही नहीं रहेंगे। अब दुकान पर जाओगे, कहेगा सामान दिखाओ। नहीं, थोड़ी अलग क्वालिटी। मैं तो एक ही रखा हूं। कैसे दुकानदार हो, कई सामान रखना चाहिए। अगर विचार भी नहीं आए तो आप कहोगे, यार कोई बात है, विचार तो आना चाहिए। विचार आएगा तभी तो चुनाव कर पाओगे, क्या सही है, क्या गलत। अगर विचार नहीं आएंगे तो काम कैसे करोगे? विचार है तो ऑप्शन है। सब विचार से हमको कुछ मतलब, आपको जिस पर काम करना है, करो।
जब आप कपड़े की दुकान पर जाते हो, फल की दुकान पर जाते हो, तो वह अनेक तरह का कपड़ा दिखाता है। अगर एक ही बस दिखाए, तो लेना तो आपको एक ही है, लेकिन कई कपड़े क्यों देखते हो? विचारों की वैरायटी है। गुस्सा एक विचार है। वही तो मैं कह रहा हूं कि वह आता है, आने दीजिए। आपको किस पर काम करना है, वह देख लो। आपको जितना सामान दिखाता है, क्या सबका बिल पे करना पड़ता है? जितना लेते हो, उसका बस। अच्छा, वह ना दिखाए, बोले एक ही है, तो लोगे क्या? बोलोगे नहीं, वैरायटी दिखाओ। लेना एक है, देखते कई हो। वैसे ही हमारे पास कई विचार आते हैं। हमारे पास ऑप्शन आते हैं। किस विचार पर काम करना है, देख लो। विचार हमारे सहायता करते हैं। जब इसे समझ लोगे, बात समझ में आ गई। विचार आपकी सहायता करते हैं। जिन विचारों को आपने शत्रु मान लिया है, जिन मन को आपने शत्रु मान लिया, ये सब आपकी मदद के लिए रखे गए हैं। आप समझ क्यों नहीं पाते। अगर यह नहीं रहेंगे तो काम कैसे करोगे। विचार आपको ऑप्शन देते हैं। अगर विचार नहीं आएगा तो काम कैसे करोगे, बताओ।
आप जब कोई सामान लेने जाते हो तो कई दुकान के पते आते हैं। अगर एक ही का पता है, दूसरे का नहीं है, तो मजबूरी में आपको वही सामान लेना पड़ेगा। यह सब बचपन से बोला हुआ है, सब मतलब अच्छा ही सोचना है। वही तो गलती है आपकी। अच्छा है, ना बुरा है। उपयोग करो। कभी-कभी आपको जहर भी खरीदने जाना पड़ता है। अब तुम कहोगे, संसार में जहर ही नहीं होना चाहिए। कभी-कभी व्यक्ति को जहर भी खरीदना पड़ता है, उसे बचाने के लिए। जब जहरीला कोई भी जीव किसी को काट लेता है, उस समय किसका इंजेक्शन लगता है? तब आप बोलोगे। अब आप कहोगे, नहीं, पॉइजन का विचार तो आना ही नहीं चाहिए। अब आएगा ही नहीं तो लाओगे कैसे? जिसे आप गंदा समझ रहे हो, वह आपके काम के हैं। आप क्यों नहीं समझ रहे। अभी काम के नहीं है, कभी न कभी उसकी भी जीवन में जरूरत पड़ सकती है। उस जानकारी को मिटाना चाहते हो अपने अंदर से? यह आपने जानकारियां इकट्ठा की हैं, वही तो विचार आते हैं। क्या आप अपनी याददाश्त मिटाना चाहते हो? क्या आपको करना ही नहीं जीवन में कुछ? यह विचार क्या है? आपकी जानकारी ही तो है। क्या इस जानकारी को हटाना चाहते हो अपने अंदर से? फिर काम कैसे करोगे? यह जानकारी आपके लिए सहायक है। इसके लिए आपने बहुत मेहनत किया है। आप इसका बस उपयोग करना सीख लो। विचार आपके सहायक हैं। मन आपके सहायक है। आप क्यों नहीं समझ पा रहे हो इस बात को।
जैसे बैठे हैं हम ध्यान में, ऐसे-ऐसे दृश्य, विचार आते हैं, जो कभी देखे नहीं, सोचे नहीं, अनुभव नहीं। होते कि विचार हमने कभी सोचा भी होगा? आपने नहीं सोचा है। आपने अगले हफ्ते रविवार को क्या खाया था, आपको पता है? अब बताइए। आपने जितना संचय किया है, उतना निकलता है, और कुछ नहीं। अंदर तो आपके पास कुछ नहीं, बस आप हो। अगर जितनी जानकारी हटा दी तो खत्म। संचय कहां होते हैं? आपके अंदर। यही तो बात है। आपके अंदर अनलिमिटेड स्टोरेज है। पांच इंद्रिय कैमरा हैं। कान, आंख, नाक, मुंह, स्पर्श। ये पांच कैमरे लगे हैं। हर समय आप जानकारी इकट्ठा कर रहे हो। जितना आपने जमा किया है, जब इसे बाहर से नहीं मिलता तो अंदर का निकाल लेता है। बस इसका यही काम है। ध्यान में कभी आते हैं जो विचार, उसमें कभी सपनों में, ये सब इसी प्रकार से निकलते हैं। विचार बहुत सहायक हैं। आपको किस पर काम करना है, काम करो। इन सब पर ध्यान मत दो। विचार बहुत सहायक हैं। मन बहुत सहायक है। इसको उपयोग करना सीख तो लो।
तो हम विचलित क्यों हो जाते हैं? यही, विचारों को रोकने में। और क्या, गंदे विचार हैं। नहीं। आज जिसका उपयोग नहीं करना चाह रहे हो, कल किए थे, तो वही तो विचार आ रहे हैं। तो आप मत करिए। बात छोड़ दीजिए। आप अच्छे-बुरे में फंस गए। गड़बड़ी यह हो गई। कुछ अच्छा है, ना बुरा है। यही तो बात है। इसमें भूतकाल का भी कुछ सही-गलत आ जाता है। आएगा ना। जितना आपने किया है, वह तो आएगा। वही तो आ रहा है विचार बनकर। वही ज्यादा आ रहा है। तो आएगा ना। वह ज्यादा तब आएगा जब आप उसे रोकते हो। स्प्रिंग को ऐसे करोगे तो, पहले तो छोड़े थे तो इतने पर ही था। लेकिन आपने क्या किया, ऐसे दबा के छोड़ दिया, तो क्या होगा? फिर उछलेगा। तो यही गड़बड़ आप कर रहे हो। जबरदस्ती कर रहे हो, विचारों को रोक रहे हो। वह अपने आप आ रहे हैं, जा रहे हैं। और देखो, विचार बदलते रहते हैं। आपको क्या करना है, वह देख लो। मैं कह रहा हूं, आप झाड़ू मार रहे हो। कैसे भी विचार आएं। अगर आप झाड़ू मारो तो गंदगी साफ होगी कि नहीं होगी। आपको क्या करना है, वह देख लो। आपको क्या मतलब विचारों से।
अब आप दुकानदार को सलाह दे रहे हो, मुझे यह सामान चाहिए, लेकिन सब सामान हटा दो। अरे, सब सामान आपको नहीं चाहिए, लेकिन लोगों को चाहिए। आपकी जरूरत नहीं है। बस आप ही के लिए दुकान नहीं खोली गई है। तो प्रकृति आपके लिए बस नहीं है। फल होता रहता है। बस आता-जाता रहता है। देश, काल, स्थिति, परिस्थिति में बदलता रहता है। इधर से इधर जाएगा। बस आप ऐसे बैठे हो। कोई सड़ा हुआ, बदबू आया, गया। उसमें आप बह गए। फिर वह गया भी, बस खत्म हो गया। यूनिवर्स से आता है। वही तो बात है। इसी को तो समझना है। हमारा नहीं है। हार्ड डिस्क बाहर है। आप रोकना चाह रहे हो, और वह आपके बस में नहीं है। और आप उसे जबरदस्ती कर रहे हो, इसलिए आप परेशान हो।
अच्छे विचारों को रोक नहीं पाते, और बुरे विचार रुक जाते हैं? ना। अच्छे विचारों को लाना चाहते हो, बुरे विचारों को रोकना चाहते हो, तो ताकतवर कौन हुआ? बुरे विचार को आपने ताकतवर बना दिया। अच्छे विचारों को खा-खा के कमजोर बना दिया। तब वो बुरे विचार आते हैं ज्यादा। इसलिए आपने उसे बहुत दबाया। तो जाएंगे कहां? आपने यही तो जिंदगी भर किया है। इससे छुटकारा कैसे पाया जाए? छुटकारा क्यों पाना? आने दो। देखते रहो।
विचार के बारे में समझ में आ गया। मन को लेकर, विचार को लेकर यही सब भ्रांतियां तो पाल के रखे हो। बेमतलब सिखाई गई। पहले आपसे पहले जिसने बताया, विचारों को रोको, विचारों को रोको। वही तो गड़बड़ हो गई। मैं कह रहा हूं, एक बात बताइए। आप बैठ गए। मैं सड़ा हुआ सामने कुछ डाल दूं, और मैं बोलूं इसकी बदबू रोक लो। ऐसा विचारना है, तुम्हारी ताकत है? नाक बंद करोगे, कितनी देर कर लोगे? तब वह भी आएगी। चलिए। मैं कह रहा हूं, रूप ही, सामने कुछ ऐसा रख दो, और मैं कह दूं विचार मत लाओ। आपकी ताकत है? हो ही नहीं सकता। मैं कोई संगीत बजा दूं। आपकी ताकत है कि आप उसमें ना जाओ? अगर भाषा समझ में आती है तो हो ही नहीं सकता। मैं आपको फूल का स्पर्श कराऊं, या कांटा चुभोऊं। आपका मजाल है कि आप उसमें ना बहो? आपके बस में है नहीं। तब देश, काल, स्थिति, परिस्थिति में विचार आते हैं, जाते हैं। मैं आपके मुंह खोल के कुछ डाल दूं, और बोल दूं स्वाद नहीं लेना। आपकी ताकत है? नहीं लोगे।
आप बेमतलब का काम कर रहे हो। विचार अपने आप आते हैं और जाते हैं। आपको क्या करना है, वह देख लो। इतना क्लैरिटी आना है। वह हमारा नहीं है। यह सब हमारा नहीं है। आपके पास कुछ भी नहीं है। आपके अलावा क्या? एक जानकारी आपके पास, बस तरीका है उपयोग करने का। आपके पास बताइए, एक जानकारी आपकी हो। यहां तक आपके पास प्रश्न भी एक भी नहीं है। सब आपने बाहर से लिया है। प्रश्न बाहर से लिया है, तो उत्तर भी आपको बाहर से मिलना पड़ेगा। मिलेगा तभी आप प्रश्न से मुक्त हो पाएंगे।
आपके पास कुछ भी नहीं है, बस आत्मज्ञान है। स्वयं का कुछ भी नहीं। स्वयं के पास तो ज्ञान आपने पकड़ लिया, जबरदस्ती मेरा है। आपके पास कुछ भी नहीं है। आप बेमतलब का परेशान हो कि मेरे विचार और तेरे विचार, मेरे कर्म और तेरे कर्म। और आपके पास कुछ भी नहीं। अगर बाहर की जितनी जानकारी है सब हटा दिया जाए, तो आपके पास क्या बचेगा? आप बताओ मुझे। और आप कहते हो, यह मैं कहां से आ गया।
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