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प्रश्नोत्तर P5-0101 · भाग 5

सब कुछ पहले से तय/फिक्स है तो आगे का रास्ता कैसे करें?

सब कुछ फिक्स है। फिक्स करने में हम फंस गए। काश हम जीते। तो बस जियो। और राग-द्वेष से मुक्त होने के लिए काम करो। और जितना कर दिया, कर दिए उसकी भरपाई करो। ईमानदारी अपनाओ। सत्कर्म करके, जब आप ईमानदारी अपना लोगे तो आगे का बंधन बंधे नहीं। और सत्कर्म द्वारा पिछला आपका निकलेगा। बस यही यात्रा है। जैसे मान लीजिए आपने बेईमानी की। किसी से की। अकेले तो नहीं कर सकते। और जब आपने किसी से बेईमानी की, तो उसने क्या किया? अनेक तरह की बददुआ आपको दी। आपके साथ भी कोई करेगा तो आप ही यही करोगे। फिर इसके बाद अब क्या हुआ, कि अब आप ईमानदारी अपना लिए। बेईमानी का त्याग कर दीजिए। अब सत्कर्म किए, जरूरतमंद की सेवा की, तो सत्कर्म हो गया। उन्होंने अनेक तरह के, रोम-रोम से आपको आशीर्वाद मिला, तो उसकी सफाई होने लगी। एक समय ऐसा आएगा, उस मूल स्थिति में पहुंच जाओगे। सत्कर्म से पिछले वाला कर्म का नाश होता है, बस खत्म। और एक समय ऐसा आएगा, आप उस मूल स्थिति में, अपनी परम स्थिति को उपलब्ध हो जाओगे। फिर ना आपके जीवन में ईमानदारी रहेगी, ना बेईमानी रहेगी। जितना सत्कर्म ज्यादा करता है, उतना जल्दी। जब तक सत्कर्म करना पड़ेगा, जब तक पूरी सफाई ना हो जाए। पूरी सफाई हो गई तो सब खत्म, कर्म खत्म। सत्कर्म से पुराने कर्म खत्म होंगे, पुराने विकार खत्म हो जाएंगे। हां, आत्मज्ञान के बाद भी कर्म होता है, लेकिन कर्ता का भाव नहीं रहता। निमित्त बन जाता है। तो बंधन नहीं बनता। फिर वह निकल लेता है।

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वीडियो: अपनों की कुटिया में रहने के नियम साधक के लिए सबसे जरूरी बात क्या है ? · 2024-12-31