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प्रश्नोत्तर P6-0004 · भाग 6

अंगदान / शरीर दान / रक्तदान ठीक है?

अंगदान, पूरे शरीर का दान, आजकल लोग कर देते हैं। अगर मैं कहूं, तो कोई शरीर दान करे, एक अंगदान किया। अब पता नहीं वो अंग किसको जाएगा। पता चला, उस अंग का किस तरीके से दुरुपयोग करेगा। अगर मुझसे व्यक्तिगत पूछेंगे, तो मैं कहूंगा, हमें अगर शरीर मिला है, तो इसका उपयोग करने का अधिकार है, दान करने का नहीं। क्योंकि अगर आपने दिया, तो कहां जाएगा। अगर किसी दुष्ट व्यक्ति के हाथ में अंग लग गया, तो वो पहले दुष्टता नहीं कर पा रहा था, लेकिन आपके अंग के द्वारा करने लगा। तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? आप होंगे। क्योंकि आपने उसे ताकत दी। ऐसा नहीं कि वो किसी महात्मा के पास जाएगा। महात्मा तो लेगा भी नहीं। महात्मा किसी के अंग को स्वीकार ही नहीं करेगा। परिस्थिति में नहीं। तो वो अंग ज्यादा से ज्यादा कहां जाएगा? सदुपयोग होने की संभावना कम है। दुरुपयोग होने की संभावना ज्यादा है। तो आप देख लो। स्वतंत्रता आपकी है। अगर मुझसे पूछोगे, तो मैं कहूंगा, इस अंग पर आपका अधिकार है सदुपयोग करने का। आप इसे कैसे उपयोग करो। आपका दान देने का अधिकार नहीं है। उसका उपयोग कौन करे, ये पक्का नहीं है। लिखित में ये नहीं दिया जा रहा, कि ये अंग मैं दान कर रहा हूं, तो इसका उपयोग कौन करेगा। ऐसा है नहीं। और अगर किसी दुष्ट के पास मेरा अंग चला गया, तो दुष्ट दुष्टता ही करेगा। फिर उसका परिणाम मुझे भी मिलेगा। इसलिए इस अंग का सदुपयोग करो। बस मेरा इतना कहना है। मैं अपनी समझ से कह रहा हूं। बाकी आपकी मर्जी है, स्वतंत्रता है। रक्तदान की भी वही बात है। रक्त दे किसे रहे हो? पता ही नहीं चलता। मेरा यही कहना है, आप देख किसे रहे हो। मेरी मानवता का उपयोग कहां हो रहा है? अगर मैं कुछ ताकत दे रहा हूं, उसका उपयोग कहां हो रहा है? ब्लड का कभी बच्चे के लिए भी उपयोग हो जाता है। घुमा-फिरा के यही है, कि उपयोग कहां किया जा रहा है। मेरे दिए हुए वस्तु का, मेरे दिए हुए अंग का, मेरे दिए हुए सामान का, अगर सदुपयोग हो रहा है, तो मुझे देना चाहिए। लेकिन ये पक्का कर लो। ये पक्का हो नहीं सकता। ये पक्का नहीं। फिर देख लो क्या करना है। फैसला आप लो। फैसला थोपा हुआ नहीं। जहां उपयोग होगा, वैसी ऊर्जा आपके पास आएगी। भाव तो कोई काम का नहीं। मैं सोचूं, मेरा भाव शुद्ध है, किसी लंगड़े को मेरी हड्डी लग जाए, वो ठीक हो जाए। लेकिन उसके बाद वो करे क्या? हड्डी कहीं उपयोग हो जाए, और वो जाके किसी का मर्डर ही कर दे। जैसे सामान उपयोग हुआ। किसी ने बंदूक खरीद के मार दिया, तो भी पूछा जाएगा, कौन सी दुकान से खरीद के लाया, अथॉरिटी है कि नहीं, कहां से आया, किसने दिया। पूरी इंक्वायरी होगी। मेरी हड्डी, आंख कहां से निकली। जब आदमी फंसता है, तो पूरी इंक्वायरी होती है, कहां-कहां से आया। ऐसा नहीं कि सिर्फ मारने वाला पकड़ा जाएगा। कर्म का सिद्धांत इतना गहरा है। मैंने आंख दे दी किसी को, और उसने जाके मर्डर कर दिया, रेप कर दिया, आतंक मचा दिया, जनमानस की हानि कर दी। एक सच्ची कहानी है। एक आदमी को आंख दी गई। देने वाले ने सोचा, मैं बूढ़ा हो गया, मेरी उम्र जाने वाली है, ये जवान है, इसको दे देता हूं। उसने दी। तो सबसे पहले उसी आदमी का मर्डर किया, जिसने आंख दी थी। कह रहा था, मैं जिंदगी में मजा लेना चाह रहा था, देख नहीं पा रहा था। ये हुआ, ले, तेरा ही तो है। तू मुझे ना देता। अब कोई बात नहीं, मैं जेल में जाऊंगा, लेकिन मैंने मजा तो ले लिया। लेकिन देने वाले के लिए सजा बन गई। किसी को बंदूक भी चाहिए, तो उसकी पूरी इंक्वायरी होती है। पूरा कागज लिया जाता है, आईडी ली जाती है, कि कल ये कुछ करेगा तो इसे पकड़ा जाएगा। सिस्टम की व्यवस्था है। पूरी आईडी लेता है। क्यों लेता है? पहले पूछा ही जाता है। बंदूक का लाइसेंस लूं, तो मुझे क्या जरूरत है, बतानी पड़ेगी। समाज में सदुपयोग क्या करोगे। आपने अपने नाम से कुछ ले लिया, और उसका दुरुपयोग इन्होंने किया, तो पहले आप भी पकड़े जाओगे। किसके नाम से हुआ। आपने इनको क्यों दिया? अपने नाम से नहीं लेते, तो इनके हाथ में जाता ही नहीं। कर्म का सिद्धांत पीछा नहीं छोड़ता। तो आप क्या कर रहे हो, किस स्थिति में कर रहे हो, ये समझना बहुत जरूरी है। और खुद को समझना।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 23 अगस्त 2026 #योगी · 2026-08-23