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प्रश्नोत्तर P6-0060 · भाग 6

योगी जी नमन। मैं अपनी जिंदगी का उद्देश्य कैसे तय करूं?

यह तो आपको ही तय करना पड़ेगा कि आपको क्या चाहिए। बहुत ज्यादा झमेला थोड़ी ना है। क्या आपको हजारों ऑप्शन हैं? आप उद्देश्य पक्का ही नहीं कर पा रहे हो। दो ही तो उद्देश्य हैं भाई। एक, शादी विवाह करके प्रॉपर्टी और वैभव बनाते बनाते खत्म हो जाना। दूसरा, उससे हटकर आत्मिक कल्याण करना। दो ही तो उद्देश्य हैं। तीसरा कोई है क्या? तो यह पूछने की बात ही नहीं। आत्मिक कल्याण मतलब क्या? आत्मिक कल्याण मतलब दुख, राग, द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा, मेरा और कर्ता के भाव से मुक्त होना। जहां मैं परेशान हूं, वहां से अपने आप को छुड़ा लेना आत्मिक कल्याण है। जिससे मैं परेशान हूं, उससे अपने आप को निकाल लेना आत्मिक कल्याण है। जिन जिन चीजों से, जिन जिन व्यक्तियों से, जिन जिन मेरे कर्मों से मैं परेशान हूं, उनसे अपने आप को निकाल लेना आत्मिक कल्याण है। अपने दुखों के कारण से अपने आप को निकाल लेना आत्मिक कल्याण है। अब मुझे यह देखना है कि मैं किसके द्वारा दुखी हूं। पहले देखना है, मैं दुखी हूं कि नहीं। अगर दुखी नहीं हो तो बात खत्म। तब तो आपका आत्मिक कल्याण हो गया, कोई टेंशन नहीं है। अगर आपके पास दुख नहीं है, तब तो आपका आत्मिक कल्याण हुआ है। कोई टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। अब आपको लग रहा है कि नहीं, मेरे जीवन में दुख है, अशांति है, व्याकुलता है, उदासी है, बेचैनी है, घबराहट है। मैं समझ नहीं पा रहा हूं क्या करूं, क्या ना करूं। अगर यह सब बातें हैं तो देखिए किसके द्वारा हैं। अगर हैं तो किसी के द्वारा होंगी। उस द्वारा तक जाना होगा और उस द्वारा तक जाकर उसे छोड़ना होगा। द्वारा तक क्यों जाना है? उसे छोड़ना है, स्रोत को खत्म करना है। द्वारा तक जाओगे तभी स्रोत खत्म होगा। द्वारा को बस समझ लोगे तो नहीं खत्म होगा। उस द्वारा तक जाना पड़ेगा। बाहर से देखने मात्र से वह बंद थोड़ी ना हो जाएगा। तो भाई, आत्मिक कल्याण का मतलब आप समझ गए ना। यही आत्मिक कल्याण है कि मेरे दुखों का जो कारण है, उससे अपने आप को छुड़ा लेना। यही आत्मिक कल्याण है।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 10 मई 2026 #योगी · 2026-05-10