प्रश्नोत्तर P6-0074 · भाग 6
भोपाल से इंदौर जनरल टिकट पर आया। बोगी भरी थी और इम्प्लांट की वजह से नीचे नहीं बैठ सकता था, इसलिए स्लीपर में जगह देखकर बैठ गया। क्या यह बेईमानी हुई? दुकान पर तंबाकू बेचता हूं, खुद नहीं खाता, क्योंकि उसे गलत मानता हूं। ग्राहक दूसरी दुकान चले जाएंगे तो क्या करूं? शादी नहीं की, बच्चे नहीं हैं। घर वाले उम्र और गर्मी कहकर रोकते हैं। आध्यात्म में बीस-पच्चीस साल हो गए, स्वामी राम के सत्संग में भी रहा, फिर भी वह जगह नहीं छूटती। दुकान का सामान पिछले साल भी पड़ा था। बात करने से मना है, जरूरत में बोल सकता हूं क्या? दुकान पर मच्छर आते हैं, अहिंसा नहीं रहती। कमाई के लिए दुकान जरूरी लगती है। हैंडीकैप की पेंशन एक हजार मिलती है। दो महीने से ज्यादा बाहर रहूं तो रद्द करने की बात होती है। गायों को खाना देता हूं तो पड़ोसी परेशान होते हैं। मुझे क्या करना चाहिए?
जरूरत में गया। वहां स्लीपर में रास्ता था, जगह थी, उसका उपयोग कर लिया। बेईमानी तब कहते हैं, जब मेरे कर्म से किसी को तकलीफ होती है। जरूरत में किया, उसे बेईमानी नहीं कहते।
तंबाकू बेच रहा है। उसे खाकर बहुत लोगों को रोग होता है। तू खुद क्यों नहीं खाता? क्योंकि गलत है न। तो मत बेच। कोई और व्यापार कर ले। ग्राहक कहें कि यह नहीं रखोगे तो दूसरी दुकान चले जाएंगे, यह छोड़ दे। तंबाकू दुकान से निकाल दे। तेरा कल्याण हो या न हो, बहुत लोगों का हो जाएगा। वे दूसरी जगह खाएंगे, वह अलग बात है। तू निमित्त मत बन। एक होता है बिगाड़ने वाला। कोई बिगड़ रहा है, तो बिगाड़ने वाले में तेरा नाम न आए। नहीं तो बिगाड़ने वाले को भी दंड मिलता है। जो खुद बिगड़ता है, उसे दंड मिलेगा। जो बिगाड़ने का निमित्त बनता है, उसे भी दंड मिलता है। बिगाड़ने वाले में मत जाना।
विवाह नहीं किया। फिर तू यहीं रह। जब तक वहां है, वहां से छोड़। वहां किसके लिए है? किसी के लिए नहीं। यही तो पूछ। मोह आ सकता है, बस और कुछ नहीं। बचपन से जो है, उससे छुड़ाने के लिए ही तो बात है। छोड़ दे। एक साल में एक बार, एक महीना, ऐसे ही आता रहे, यह कब तक? मोह है, तो छोड़। वहां कर्म क्या करना है? तेरे पास कुछ नहीं है। फिर भी जमीन-जमीन की बात करता है। तेरे पास पूरा मौका है। जगह है। शादी नहीं, बच्चे नहीं। किससे मोह है?
घर वाले रोकते हैं। गर्मी का बहाना करते हैं। बीमार होकर आएगा, ऐसी बात करते हैं। इस उम्र में क्यों जाता है, कौन तेरा कल्याण कर देगा, इस उम्र में क्या कर सकता है। सही बोलते हैं। बचपन से लगना चाहिए। मैं भी यही कहता हूं। पर अभी इस उम्र में भी पूरी तरह लग जा। अभी देख, पूरी तरह लग नहीं पा रहा। तेरे पास कुछ भी नहीं है। फिर भी जाने की तैयारी है। दुकान का सामान खत्म करने की बात अगले साल भी थी। मुंह से यह कब खत्म होगा? मैंने कहा था, जब आना तो यह सोचकर आना कि फिर नहीं जाऊंगा। वह दिन कब आएगा? एक साल बीत गया। आध्यात्म में बीस-पच्चीस साल हो गए। स्वामी राम के पास बीस साल। बीस साल में भी तू उसी जगह पर है। छोड़ नहीं रहा। थोड़ा इधर से ज्ञान, थोड़ा उधर से। बीस साल में उन्नति होती, तो अपने कल्याण के लिए किसी आश्रम में, एकांत में, पड़ जाता। यहां कमी है क्या? नहीं है। तब यहां आ जा।
अभ्यास नहीं हुआ, इसलिए आजादी कम लगती है। अभ्यास रहते-रहते होगा। बात करना मना है, यह नियम तेरे आत्मिक कल्याण के लिए ही है। बात करेगा ही क्यों। अगले साल जब आया था, तब मैं सेवक रूप में था। तब भी नियम था। आपस में बात मना थी। मोबाइल बंद रहता था। लोग बाथरूम में जाकर बात कर लेते थे। अब पूरा जाकर वहां जाना है, इसलिए पूछना पड़ता है। जरूरत हो तो बात कर सकता है। जरूरत में बोल रहा है, तो बोलकर भी बात नहीं हो रही। बात तब होती है जब शब्दों का रसपान करे। जरूरत में बोला, तो बोलकर भी मौन है। इसी को मौन कहते हैं। जरूरत में ही बोलना है। शब्दों में रस नहीं लेना है। और देखना है कि बोलने की जरूरत है भी या नहीं। कहीं रस के चक्कर में जरूरत तो नहीं पैदा कर रहा। यह देखना है।
दुकान पर मच्छर हैं, अहिंसा नहीं रहती, यह कहता है। दुकान बंद कर। तुझे दुकान की जरूरत ही नहीं। कर्तव्य बताता है। कौन सा कर्तव्य तेरा है? उसी से कमाई होती है। तुझे कमाने की क्या जरूरत है? क्यों कमा रहा है? लगता है कमाना चाहिए। वहां रहना है तो कमाना पड़ेगा। जरूरत है। तू वहां रह ही मत। यहां आ जा। पेट के लिए रोटी, तन पर कपड़ा, रहने को मकान। यह यहां है न? यहां आ जा। वहां रह ही क्यों रहा है? जो लोग तुझे इतना प्यार करते हैं, रोटी नहीं दे सकते क्या? निठल्लों के बीच रहता है क्या? वे कमाते हैं या नहीं? इतना मोह है कि लू लग जाएगी, इसलिए रोकते थे। तो दुकान बंद कर। एक कमरे में पड़ा रह। खा और सो। काम करने की क्या जरूरत है?
जीवन में कब उतारेगा? सुना तो है। सुनने से कल्याण नहीं होता। जीवन में उतारने से होता है। जब अपनाएंगे, तब होगा। तुझे दुकान चलाने की आवश्यकता नहीं। इतने लोग प्यार करते हैं, भोजन नहीं दे सकते क्या?
उनका खाएगा तो उनकी माननी पड़ेगी। स्वाधीनता नहीं रहेगी। कुछ बोल नहीं सकेगा। हां, उनका खाया तो मानना पड़ेगा। कमाकर देगा तो बोलना पड़ेगा। बोलेगा तो तेरा चलेगा, नहीं तो नहीं। एक्सीडेंट के समय कहते थे, शादी कर लो, अब कौन करेगा तेरा। निकलने का पूरा मौका था, तब भी नहीं निकला। ऐसे-ऐसे महापुरुष पृथ्वी पर पड़े हैं। अभी भी मौका है। यहां हमेशा के लिए खा, पी, आराम से रह। पर तू रहेगा नहीं। वहां रहना तेरी दुर्बलता है। दुर्बलता में ही रुका है। तू दुर्बलता कहता है, पर अंदर से वह पक्का नहीं है। जिस दिन पता चल जाएगा कि वहां रहना दुर्बलता है, तू रुक ही नहीं पाएगा। बोलने में हम कुछ भी बोल देते हैं। बोलने में मजा आता है। बोलने में बड़े-बड़े त्यागी बन जाते हैं। करने की बारी आती है, तो पीछे हट जाते हैं। रह। अपना आत्मिक कल्याण कर।
हैंडीकैप का सर्टिफिकेट बनवाया, पेंशन मिलती है। दो महीने से ज्यादा बाहर रहे तो कैंसिल कर देंगे, यह कहते हैं। महीना एक हजार मिलता है। तू हैंडीकैप है क्या? अभी तो नहीं। तो क्यों लेता है? उसका भी पाप लगेगा। हैंडीकैप है तो ले सकता है। नहीं है, और ले रहा है, तो भरपाई पता नहीं कितनी करनी पड़ेगी। हैंडीकैप नहीं है तो क्यों ले रहा है? बेईमानी पर बेईमानी। न दायित्व है, न जिम्मेदारी, और हालत यह है। कंजूस इतना कि दो रोटी का खर्च भी नहीं। पेट भर खा ले, और कुछ खाता-पीता नहीं। सोए का धन शैतान खाता है। आदत गंदी है। कहीं से मिल जाए और इन लोगों को दे दूं। सोए हुए का धन शैतान खाता है।
गाय को खाना देता है, तो चार-पांच और आ जाती हैं। पड़ोसी कहते हैं, तुम देते हो इसलिए परेशान करते हैं, ग्राहक के सामने भगाओ। कोई बात नहीं। सुन लिया कर। सत्कर्म के लिए चौराहा ढूंढ ले। वहां डाल दिया कर। गली खराब नहीं होगी। गाय को ले जाकर और कहीं डाल दिया कर। जगह-जगह देता है, यह ठीक है। पर हैंडीकैप का पैसा लेना छोड़। तू हैंडीकैप नहीं है। ऑपरेशन हुआ, इम्प्लांट है, तीन महीने पड़ा रहा, उसी का सर्टिफिकेट बनाकर अब तक लाभ ले रहा है। देख ले, तुझे क्या करना है। आराम से रह। साधना कर। अपना कल्याण कर। यहां का नियम पढ़ ले। उसी नियम में रह।
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