प्रश्नोत्तर P6-0144 · भाग 6
मैं अपने भीतर आना चाहता हूं, लेकिन एक मिनट में बाहर चला जाता हूं और उलझ जाता हूं। सत्संग सुनने के लिए कुछ समय अंदर आया था, फिर बाहर चला जाता हूं। चाबी अपने पास रखूं या महापुरुष को दे दूं? साधक और सेवक में क्या फर्क है? जिसे चाबी देनी है, उसकी जांच कैसे करें?
कोई बात नहीं। ऐसे अंदर-बाहर करते रहो। एक दिन लॉक लग जाएगा। देखना, अंदर ही लॉक लगाना। बाहर से लॉक मत मार देना। अंदर आकर लॉक ही मार दो। और लॉक मार के चाबी फेंक दो। फिर मन करता है, बाहर झांक के आएं। किसी के हाथ में दे दो। किसको दे। फिर वो बार-बार डिस्टर्ब करेगा। उस चाबी को किसी ऐसे महापुरुष के हाथ में दे दो कि भाई, बस ले ले। तू जहां ले जा। जहां जाएगा, वहां तुम्हें लेके चला जाएगा।
दो ही तरते हैं। या तो सेवक, या तो साधक। देख लो, तुममें गुण क्या है। चाबी लेके चलने वाला गुण है, या चाबी देके चलने वाला गुण है। दो ही सत्य हैं, साधक या सेवक। साधक अपनी चाबी खुद रखता है, और वो कभी भी बाहर-अंदर कर सकता है। लेकिन सेवक चाबी दे देता है कि तू चाहे अंदर रख, चाहे बाहर रख, तेरी मर्जी। क्योंकि मैं अंदर भी हूं तो तेरी मर्जी से, बाहर भी हूं तो तेरी मर्जी से। क्योंकि मुझे कहीं होना नहीं है। मुझे होने से ही मुक्त होना है। यह सेवक का भाव है।
अगर मैं यहां भी हूं, तो तेरी मर्जी। मेरी मर्जी तो है ही नहीं। मैं चाहे अंदर हूं, चाहे बाहर हूं, तेरी मर्जी से हूं। क्योंकि मुझे कहीं होना ही नहीं है। तो यह सेवक समझ जाता है, और चाबी दे देता है कि भाई, यह ले। मैं जहां भी हूं, तेरी मर्जी से हूं, तो मेरी मर्जी ही नहीं है। यह सेवक का भाव। और साधक का भाव यह है कि चाबी मेरे हाथ में है। मुझे अंदर रहना है या बाहर रहना है, यह मैं तय करूंगा। जोखिम दोनों में है। अगर चाबी दोगे, तो पहले समझ लो, चाबी किसके हाथ में दे रहे हो। क्या पता, कहां शिफ्ट कर दे।
जांचना उसके कर्म से होता है। जैसे आज आप यहां आए, कुछ समय पहले। मेरे द्वारा क्या कार्य हो रहे हैं, चौबीस घंटे आपको पता है। तो क्या आप जांच नहीं पाए। यही तो जांच है। अब जिसके साथ रहोगे, वो जांचा जाएगा। जिसके साथ आप जीने लगोगे, वो जंच जाएगा। जांचने की अलग से जरूरत नहीं पड़ेगी। आप सीधे किसी से अलग होकर किसी को नहीं जांच सकते। अगर किसी को जांचना है, तो आपको उसके साथ होना पड़ेगा। वो जंच जाएगा। वो आपको जांच लेगा। आप उसको जांच लोगे कि कौन किसके लायक है।
जज तो दोनों ही रहे हैं। दोनों जंच रहे हैं। अगर कोई मशीन किसी को जांच रही है, तो मशीन को जांचने वाला भी कोई है। हो सकता है मशीन टूटी हुई हो, कोई गलत बता रही हो। ऐसा होता भी है, बहुत बार। तो मशीन के पीछे भी कोई है, कि मशीन सही है कि नहीं। उसके पीछे भी कोई है, कि इसको जांचना आता भी है कि नहीं। एक के पीछे एक, आखिरी परमात्मा। आंख के पीछे कितने लोग हैं, आपको नहीं पता। आप किसी सिस्टम को चला रहे हो, पीछे कितनी जांच हुई है, आपको नहीं पता।
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वीडियो: Sunday Q&A August 2, 2026 #Yogi · 2026-08-02