प्रश्नोत्तर P8-0093 · भाग 8
सब कुछ फिक्स था, इस पर और खुलकर समझाइए, ताकि सही से समझ आए।
सब कुछ फिक्स था, मतलब आप फिक्स करके ही आए। आप आए थे न। जैसे एक व्यक्ति नौकरी करता है। जैसे सरकारी नौकरी उसकी लग गई, तो सब फिक्स होता है। तुम्हारा इतना पेमेंट है, यह काम करना है। अगर वह ईमानदारी से काम करता रहता है, तो एक दिन रिटायर होकर उसे पेंशन मिलती है, और वह जहां काम करता था वहां से छूटकर अपने घर चला आता है। लेकिन अगर उसी व्यक्ति ने क्या किया? फिक्स तो सब था, उसे बता दिया गया था लेटर में कि यह काम करना पड़ेगा, इसके लिए सब साइन करवा लिया जाता है। लेकिन अगर उसने अपने कर्म में बेईमानी कर दी और पकड़ा गया, तो घर नहीं जाएगा, जेल जाएगा। कहां जाएगा? जेल।
तो ये सब जेल में खड़े हो। यह पिंड है न, यह जेल की तरह है। अब आप सजा काट रहे हो। अपने घर तभी जाओगे जब आपकी सजा खत्म होगी। लेकिन आप क्या करते हो? नई-नई गलतियां करके, नए-नए धाराएं अपने ऊपर लगवा रहे हो। पुराना खत्म ही नहीं हो रहा है। अगर एक अपराधी अपराध करना छोड़ दे, तो फिर जितनी सजा उसे लगी है, जिस दिन वह पूरी होगी, और सत्कर्म और ईमानदारी अगर सही से की, तो जेलर कुछ सजा कम करवा के उसे बाइज्जत बरी कर देगा, सम्मान के साथ। लेकिन अब वह क्या कर रहा है? अपराध पर अपराध करते जा रहे हो। फिक्स तो सब था, लेकिन तुम फिक्स करने लगे। नौकरी करने के पहले ही सब फिक्स होता है न। नौकरी कहती है, भाई तेरा यह काम है। और अगर वह बेईमानी करके पकड़ा जाता है, तो घर न आकर जेल चला जाता है।
तो अगर हम लोग भी ईमानदारी और सत्कर्म अपना लें, और सत्संग सुनें, तो हम एक दिन अपने घर पहुंच जाएंगे। बस तुम बेईमानी छोड़ दो। तुम एक दिन अपने घर चले जाओगे। और जब तक बेईमानी करोगे, बस एक शरीर से दूसरा शरीर, दूसरा शरीर, ऐसे ही शरीर मिलता जाएगा। जैसे मान लीजिए आपकी जेल हो गई, लेकिन जेल में भी जाकर तुमने किसी को मार दिया, वहां भी तुमने कुछ लूटपाट कर दी, तो एक धारा और लग जाएगी। बढ़ता जाएगा। इस जेल से वह जेल, उस जेल से वह जेल। और जितना उलझोगे, उतनी सजा भी बढ़ती जाएगी, और कठोर सजा दी जाएगी आपको।
तो भैया, निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता है। आप लोग समझ लो। ईमानदारी और सत्कर्म।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 26 अप्रैल 2026 #योगी · 2026-04-26